Edited By Sarita Thapa,Updated: 04 Jun, 2026 10:22 AM

आज कल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग छोटी से छोटी बातों को लेकर ओवरथिंक करने यानी छोटी-बड़ी बात पर जरूरत से ज्यादा सोचने लग जाते हैं। जो तनाव, चिंता और मानसिक थकान और बेचैनी का कारण तो बन रही है।
Bhagavad Gita lessons for mental peace : आज कल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग छोटी से छोटी बातों को लेकर ओवरथिंक करने यानी छोटी-बड़ी बात पर जरूरत से ज्यादा सोचने लग जाते हैं। जो तनाव, चिंता और मानसिक थकान और बेचैनी का कारण तो बन रही है। साथ ही मासिकक समस्या को भी तेजी से बढ़ा रही है। ओवरथिंक करने से आदत न केवल व्यक्ति का सुकून छीन रही है, बल्कि उनकी सोचने-समझने की शक्ति को भी कमजोर कर रही है। यदि आप का मन भी बहुत सारे विचारों में फंसा हुआ है, तो भगवद् गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने ओवरथिंक से बचने की 5 शिक्षाएं पर जोर दी है।
परिणाम की चिंता छोड़े
भगवद् गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि तुम अपने कर्म करते रहो और परिणाम की चिंता छोड़ दो। व्यक्ति किसी भी काम को करने से पहले उसके नतीजे पर पहले सोचने लगा जाता है और अपने वर्तमान को कल की चिंता से खराब कर देता है। भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि जो व्यक्ति आने वाले नतीजे की चिंता को छोड़कर अपनी मेहनत पर भरोसा करता है, तो उसके ओवरथिंक करने की आदत अपने आप छुट जाती है।
मन को नियंत्रण में करना सीखें
भगवत गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने मन को स्थिर रखने का आदेश दिया है। ओवरथिंकिंग तब होती है जब हमारा मन बेलगाम होकर कहीं भी भागने लगता है। गीता के अनुसार, अभ्यास और वैराग्य के जरिए मन को अनुशासित किया जा सकता है। जब भी दिमाग में विचारों का तूफान उठे, तो ध्यान या सांसों पर ध्यान केंद्रित करने का अभ्यास करें।

बदलाव को स्वीकार करें
श्रीकृष्ण जी के अनुसार, जो व्यक्ति हर परिस्थिति को स्वीकार करना सीख जाता है, उसे किसी भी तरह की कोई चिंता परेशान नहीं कर सकती है। क्योंकि जीवन में सुख-दुख, उतार-चढ़ाव आते-जाते रहते हैं। इसलिए बदलाव से डरने के बजाय उसे जीवन का हिस्सा मानकर स्वीकार करना सीखें।
उम्मीदें कम करें, खुद पर निर्भर रहें
गीता हमें आत्मनिर्भर बनने की सीख देती है। जब आप अपनी खुशी और शांति के लिए दूसरों पर निर्भर रहना छोड़ देते हैं, तो आपकी आधी मानसिक परेशानियां और ओवरथिंकिंग वैसे ही समाप्त हो जाती हैं।
जो हुआ, जो हो रहा है, वह सब बेहतर है
गीता का सार हमें सिखाता है कि जो बीत गया, वह अच्छा था और जो वर्तमान में हो रहा है, वह भी किसी न किसी वजह से सही है। जब आप इस सच्चाई को स्वीकार कर लेते हैं, तो आपका मन ऐसा क्यों हुआ या वैसा क्यों नहीं हुआ के जाल से बाहर निकलकर शांत हो जाता है।

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