Edited By Tanuja,Updated: 23 Jul, 2026 02:28 PM

कराची में ट्रैफिक जाम और संकरी गलियों से निपटने के लिए शुरू की गई साइकिल एंबुलेंस सेवा सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। कुछ लोग इसे पाकिस्तान का मजाक बना रहे हैं, जबकि कई विशेषज्ञ इसे कम लागत वाला व्यावहारिक समाधान बता रहे हैं, जो आपात स्थिति में मरीज...
International Desk: सोशल मीडिया पर इन दिनों पाकिस्तान के कराची की साइकिल एंबुलेंस का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद इंटरनेट पर इसे लेकर जबरदस्त बहस छिड़ गई है। कई यूजर्स इसे पाकिस्तान की तकनीकी पिछड़ापन बताकर ट्रोल कर रहे हैं, जबकि कई लोग इसे ट्रैफिक जाम से जूझ रहे शहर के लिए एक व्यावहारिक और कम लागत वाला समाधान बता रहे हैं। दरअसल, कराची की भीड़भाड़ वाली सड़कों और संकरी गलियों में कई बार एंबुलेंस समय पर मरीज तक नहीं पहुंच पाती। इसी समस्या से निपटने के लिए सिंध इंटीग्रेटेड इमरजेंसी एंड हेल्थ सर्विसेज (SIEHS-1122) ने मई 2025 में साइकिल एंबुलेंस का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया था।
साइकिल एंबुलेंस में क्या-क्या है?
इन साइकिलों पर प्रशिक्षित इमरजेंसी रेस्पॉन्डर्स सबसे पहले घटनास्थल पर पहुंचते हैं, मरीज को प्राथमिक उपचार देते हैं और एंबुलेंस आने तक उसकी हालत को स्थिर रखने की कोशिश करते हैं। यह कोई सामान्य साइकिल नहीं, बल्कि विशेष रूप से तैयार की गई माउंटेन बाइक है, जिसमें कई जरूरी चिकित्सा उपकरण मौजूद हैं, जैसे—
- फर्स्ट एड किट
- ऑक्सीजन सिलेंडर और मास्क
- नेबुलाइजर
- ब्लड ग्लूकोज टेस्टिंग डिवाइस
- अन्य जरूरी लाइफ-सेविंग उपकरण
इस पहल की खास बात यह है कि इसमें बड़ी संख्या में प्रशिक्षित महिला वॉलंटियर्स भी शामिल हैं। इससे न सिर्फ आपातकालीन सेवाओं की पहुंच बढ़ी है बल्कि महिलाओं की भागीदारी भी मजबूत हुई है।
सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग
वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर मीम्स और तंज की बाढ़ आ गई। कई यूजर्स ने लिखा कि "जब दुनिया चांद पर पहुंच गई है और एयर एंबुलेंस- ड्रोन हेल्थकेयर की बात कर रही है, पाकिस्तान साइकिल एंबुलेंस चला रहा है।" वहीं कुछ लोगों ने इसे पाकिस्तान का "सबसे बड़ा इनोवेशन" बताते हुए व्यंग्य किया।हालांकि, कई विशेषज्ञों और सोशल मीडिया यूजर्स ने इस पहल का समर्थन भी किया। उनका कहना है कि घनी आबादी, ट्रैफिक जाम और संकरी गलियों वाले इलाकों में साइकिल एंबुलेंस मरीज तक सामान्य एंबुलेंस से कहीं पहले पहुंच सकती है। ऐसे में यह कम लागत वाला और प्रभावी समाधान साबित हो सकता है।