शिष्टाचार या अपमान ? अंग्रेज अफसर की हेकड़ी निकालने के लिए विद्यासागर ने चली कौन सी ऐसी चाल कि दुनिया देखती रह गई

Edited By Updated: 27 Feb, 2026 03:26 PM

ishwarchandra vidyasagar story

ईश्वरचंद्र विद्यासागर उन दिनों एक संस्कृत कॉलेज के आचार्य थे। एक बार उन्हें किसी काम से प्रैसीडैंसी कॉलेज के अंग्रेज प्रोफैसर कैर से मिलने जाना पड़ा। कैर भारतीयों से घृणा करता था।

Ishwarchandra Vidyasagar Story : ईश्वरचंद्र विद्यासागर उन दिनों एक संस्कृत कॉलेज के आचार्य थे। एक बार उन्हें किसी काम से प्रैसीडैंसी कॉलेज के अंग्रेज प्रोफैसर कैर से मिलने जाना पड़ा। कैर भारतीयों से घृणा करता था। जिस समय ईश्वरचंद्र उसके पास पहुंचे, वह मेज पर जूते रख पैर फैलाकर बैठा हुआ था। ईश्वरचंद्र को देखकर भी न तो वह उनके सम्मान में खड़ा हुआ और न ही उनके अभिवादन का जवाब दिया।

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ईश्वरचंद्र ने उस समय तो कुछ नहीं कहा लेकिन तय कर लिया कि वक्त आने पर कैर को सबक सिखाएंगे। संयोगवश कुछ ही समय बाद कैर को ईश्वरचंद्र से एक काम पड़ गया। वह उनसे चर्चा करने उनके पास पहुंचा। जैसे ही कैर को उन्होंने अपने पास आते देखा, उन्होंने चप्पलें पहनीं और मेज पर पैर फैलाकर बैठ गए।

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कैर एकदम सामने आ खड़ा हुआ, फिर भी ईश्वरचंद्र ने उन्हें बैठने के लिए नहीं कहा। यह देखकर कैर गुस्से से तिलमिला गया और उसने इस गलत व्यवहार की शिकायत लिखित में शिक्षा परिषद के सचिव डॉ. 'मुआट' से कर दी। मुआट, ईश्वरचंद्र विद्यासागर को भली-भांति जानते थे। फिर भी उन्होंने इस सिलसिले में उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया और कैर की शिकायत का जिक्र किया। कैर वहीं सामने खड़ा था।

डॉ. मुआट की बात सुनकर ईश्वरचंद्र बोले, "हम भारतीय लोग तो अंग्रेजों से ही शिष्टाचार सीखते हैं। जब मैं कैर से मिलने गया तो ये जूते पहनकर आराम से मेज पर पैर फैलाकर बैठे थे और इन्होंने इसी अंदाज में मेरा स्वागत किया था। मुझे लगा कि शायद यूरोपीय शिष्टाचार ऐसा ही होता है।" यह सुनकर कैर बहुत शर्मिंदा हो गया।

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