Holi 2026 : होली पर मायके वाली रस्म ! परंपरा या अंधविश्वास ? जानें पहली होली ससुराल में न मनाने के पीछे की पौराणिक कथा

Edited By Updated: 23 Feb, 2026 03:08 PM

why brides go to parents house for first holi

शादी के बाद पहली होली को लेकर भारतीय समाज में एक बहुत ही दिलचस्प और अटूट रिवाज है- नई नवेली दुल्हन का मायके जाना। रंगों के इस उत्सव में जब हर कोई अपनों के साथ होने की चाहत रखता है, तब एक नवविवाहिता को उसके ससुराल से दूर उसके माता-पिता के घर भेज दिया...

Why Brides Go to Parents House for First Holi : शादी के बाद पहली होली को लेकर भारतीय समाज में एक बहुत ही दिलचस्प और अटूट रिवाज है- नई नवेली दुल्हन का मायके जाना। रंगों के इस उत्सव में जब हर कोई अपनों के साथ होने की चाहत रखता है, तब एक नवविवाहिता को उसके ससुराल से दूर उसके माता-पिता के घर भेज दिया जाता है। यह केवल एक विदाई नहीं है, बल्कि इसके पीछे सदियों पुरानी पौराणिक मान्यताएं, रिश्तों की मर्यादा और कुछ अनकहे रहस्य छिपे हैं। कई लोग इसे महज एक परंपरा मानते हैं, तो कुछ इसे सास-बहू के रिश्तों से जुड़ा एक शुभ संकेत। आखिर क्यों नई दुल्हन के लिए ससुराल की पहली होली की अग्नि देखना वर्जित माना गया है। क्या यह सिर्फ एक अंधविश्वास है या इसके पीछे कोई गहरा मनोवैज्ञानिक आधार? तो आइए जानते हैं इस रस्म के पीछे छुपी कथा के बारे में-

Why Brides Go to Parents House for First Holi

क्यों माना जाता है इसे अशुभ ?
इस परंपरा के पीछे एक प्रमुख धार्मिक मान्यता यह है कि शादी के बाद सास और बहू को एक साथ जलती हुई होलिका नहीं देखनी चाहिए। शास्त्रों और लोक मान्यताओं के अनुसार, यदि सास और बहू एक साथ पहली होली की अग्नि को देखती हैं, तो उनके रिश्तों में भविष्य में कड़वाहट आ सकती है या घर की शांति भंग हो सकती है। जलती हुई होलिका विनाश और दहन का प्रतीक है। पुराने समय के विद्वानों का मानना था कि नई दुल्हन के लिए ससुराल की पहली होली 'अग्नि परीक्षा' की तरह न हो, इसलिए उसे प्रेम और शीतलता के प्रतीक अपने मायके भेज दिया जाता है।

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सामाजिक और मनोवैज्ञानिक कारण
पौराणिक कथाओं के अलावा, इस परंपरा के पीछे कुछ व्यवहारिक कारण भी हैं।

भावनात्मक जुड़ाव: शादी के शुरुआती महीनों में एक लड़की के लिए नए घर में ढलना चुनौतीपूर्ण होता है। होली जैसे बड़े त्योहार पर उसे मायके भेजने से उसे अपने माता-पिता के साथ समय बिताने का मौका मिलता है, जिससे उसका मानसिक तनाव कम होता है।

रिश्तों में नयापन: कुछ समय मायके में बिताकर जब दुल्हन वापस ससुराल आती है, तो रिश्तों में एक नया उत्साह और प्रेम बना रहता है।

विदाई का उत्सव: इसे एक तरह से कन्या के विवाह के बाद का पहला बड़ा 'पुनर्मिलन' उत्सव माना जाता है, जहाँ वह अपने पुराने सगे-संबंधियों से मिल पाती है।

क्या यह अंधविश्वास है ?
आज के आधुनिक दौर में कई लोग इसे अंधविश्वास मान सकते हैं, क्योंकि विज्ञान ऐसी किसी भी घटना  से नुकसान होने की पुष्टि नहीं करता। हालांकि, इसे एक 'पारिवारिक परंपरा' के रूप में देखा जाना चाहिए जो रिश्तों को जोड़ने और खुशियां बांटने का एक माध्यम है।

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