Khatu Shyam Mela 2026: आज है खाटू श्याम जी के मेले का अंतिम दिन, कथा के साथ जानें दर्शन व्यवस्था, रूट मैप, पार्किंग और ठहरने की पूरी जानकारी

Edited By Updated: 28 Feb, 2026 03:07 PM

khatu shyam mela 2026

Khatu Shyam Mela 2026: राजस्थान के सीकर जिले के खाटू गांव में खाटू श्याम जी के मंदिर में लाखों श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं। यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, करोड़ों लोगों की उम्मीद और विश्वास का प्रतीक है। हर साल यहां देश-विदेश से भक्त...

Khatu Shyam Mela 2026: राजस्थान के सीकर जिले के खाटू गांव में खाटू श्याम जी के मंदिर में लाखों श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं। यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, करोड़ों लोगों की उम्मीद और विश्वास का प्रतीक है। हर साल यहां देश-विदेश से भक्त दर्शन करने आते हैं और अपनी मनोकामना लेकर बाबा के दरबार में हाजिरी लगाते हैं।

Khatu Shyam Mela 2026

खाटू श्याम जी को ‘हारे का सहारा’ कहा जाता है। यह उपाधि उनके नाम के साथ जुड़ी हुई है। उनका असली नाम बर्बरीक था जो महाभारत काल के एक वीर योद्धा थे। वह भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र थे। बचपन से ही उन्हें युद्धकला में गहरी रुचि थी और उन्होंने भगवान शिव, अग्निदेव और अपनी कठोर तपस्या से तीन अमोघ बाण प्राप्त किए थे। 

इन बाणों की शक्ति से वह किसी भी युद्ध को कुछ ही पलों में समाप्त कर सकते थे। जब महाभारत का युद्ध प्रारंभ हुआ, तब बर्बरीक जी ने उसमें भाग लेने का निश्चय किया और इसी निर्णय ने उनके जीवन की दिशा हमेशा के लिए बदल दी।

उनका सिद्धांत था कि वह सदैव उस पक्ष का साथ देंगे जो युद्ध में हार रहा होगा। जब महाभारत का युद्ध आरंभ होने वाला था, तब वह अपनी माता की आज्ञा लेकर युद्धभूमि की ओर निकल पड़े। 

उनके पास तीन दिव्य बाण और अपार शक्ति थी, जिससे वह किसी भी युद्ध का परिणाम क्षणों में बदल सकते थे। जब भगवान श्रीकृष्ण को ज्ञात हुआ कि बर्बरीक युद्ध में शामिल होने जा रहे हैं, तो वह चिंतित हो उठे, क्योंकि उनका झुकाव जिस भी पक्ष की ओर होगा, वही विजयी होगा, जिससे युद्ध का संतुलन बिगड़ जाएगा।

तब श्रीकृष्ण ब्रह्मा जी का वेश धारण कर बर्बरीक से मिलने पहुंचे और उनकी प्रतिज्ञा को समझने के बाद उनसे शीश दान में मांग लिया। बर्बरीक ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपना शीश भगवान को समर्पित कर दिया। 

उनके इस महान बलिदान, भक्ति और धर्मनिष्ठा से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि कलियुग में वह ‘श्याम’ नाम से पूजे जाएंगे और हर दुखी, निराश तथा पीड़ित व्यक्ति का सहारा बनेंगे। तभी से उन्हें ‘हारे का सहारा श्याम’ कहा जाता है।

ऐसा विश्वास है कि खाटू श्याम जी के दरबार में जो भी सच्चे मन से अपनी मनोकामना लेकर आता है, उसकी हर इच्छा पूरी होती है। भक्त मानते हैं कि श्याम बाबा केवल सुखी लोगों की नहीं, बल्कि उन लोगों की सुनते हैं जो कठिनाइयों और दुखों में होते हैं। वह हमेशा हार मानने वालों को नई उम्मीद और शक्ति देते हैं।

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खाटू श्याम जी में लगता है भव्य मेला
फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से पहले शुरू होने वाला खाटू श्यामजी का मेला देश-विदेश से भक्तों को आकर्षित करता है। इस वर्ष यह 21 फरवरी से 28 फरवरी तक आयोजित हो रहा है। आयोजकों और अधिकारियों के अनुसार इस बार करीब 28 से 35 लाख श्रद्धालुओं के दर्शन करने का अनुमान है।

खाटू श्याम जी जाने वाले भक्तों के लिए सस्ते और आरामदायक ठहरने के कई विकल्प उपलब्ध हैं। मंदिर के आसपास कई धर्मशालाएं और आश्रम हैं जहां बहुत ही कम दामों में रुकने की सुविधा मिल जाती है। श्याम मंदिर धर्मशाला, श्री श्याम सेवा समिति धर्मशाला और अग्रवाल धर्मशाला जैसी जगहें साफ-सुथरी और सुविधाजनक हैं। इसके अलावा, खाटू बाजार और मंदिर रोड के पास छोटे होटल और लॉज भी मिल जाते हैं, जहां बजट यात्रियों के लिए बढ़िया व्यवस्था है।

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खाटू श्याम जी कैसे पहुंचें
खाटू श्यामजी का मंदिर राजस्थान के सीकर जिले में स्थित है जहां पहुंचने के लिए नजदीकी रेलवे स्टेशन रींगस जंक्शन है, जो लगभग 17 किलोमीटर दूर है। रींगस से टैक्सी, जीप या बस से मंदिर तक आसानी से पहुंच सकते हैं। 

जयपुर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा यहां से करीब 80 किलोमीटर दूर है, जहां से सीकर या रींगस तक बस या टैक्सी उपलब्ध रहती है। सड़क मार्ग से भी खाटू श्याम आसानी से पहुंचा जा सकता है क्योंकि यह जयपुर, दिल्ली और सीकर से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।

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भक्ति में डुबा सीकर 
मेले के दौरानव बाबा श्याम की नगरी में भक्तों की संख्या में भारी इजाफा देखने को मिल रहा है। खाटू कस्बे की हर सड़क और गलियों में केवल ‘जय श्री श्याम’ के जयकारों की गूंज सुनाई दे रही है। 

इस वर्ष बाबा श्याम का दरबार एक नए और भव्य रूप में नजर आ रहा है। श्री श्याम मंदिर कमेटी के मंत्री मानवेन्द्र सिंह चौहान ने जानकारी दी कि करीब 120 बंगाली कारीगरों ने मिलकर बाबा के दरबार की सजावट की है। मंदिर परिसर में बंगाली संस्कृति और कला का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। 

गर्भगृह से पहले कई आकर्षक झांकियां सजाई गई हैं, जो भक्तों के आकर्षण का मुख्य केंद्र हैं। सबसे पहले भक्तों को 12 ज्योतिर्लिंगों की झांकी के दर्शन होते हैं, जो अध्यात्म का गहरा अहसास कराती है। इसके बाईं ओर वीर बर्बरीक की गौरवशाली जीवन गाथा को दर्शाती झांकी है, जबकि सामने दाईं ओर माता का भव्य दरबार सुसज्जित किया गया है। इन झांकियों की भव्यता देखकर भक्त मंत्रमुग्ध हो रहे हैं।

मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम दर्शन के लिए विशेष रूट मैप तैयार किया गया है। मेला मैजिस्ट्रेट एवं दांतारामगढ़ एस.डी.एम. मोनिका सामोर ने बताया कि रींगस से पैदल आने वाले श्रद्धालुओं को पहले करीब 17 किलोमीटर की मुख्य पदयात्रा करनी पड़ती है। 

इसके बाद खाटू कस्बे में प्रवेश करने पर मंदिर परिसर तक पहुंचने के लिए जिक-जैक और अन्य गलियों के माध्यम से 3 से 4 किलोमीटर का अतिरिक्त रास्ता तय करना होता है इस प्रकार रींगस से मंदिर तक का कुल सफर वर्तमान में 20 से 22 किलोमीटर का हो रहा है। प्रशासन का अनुमान है कि एकादशी और द्वादशी के दिन भीड़ का दबाव बढ़ने पर यह दूरी बढ़कर 26 से 28 किलोमीटर तक हो सकती है। इसके लिए सुरक्षा, चिकित्सा और पेयजल की पुख्ता व्यवस्था की गई है।

यातायात प्रबंधन और कलर-कोडेड पार्किंग वाहनों के भारी दबाव को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने 25 हजार से अधिक वाहनों की क्षमता वाली चार बड़ी निशुल्क पार्किंग बनाई हैं। इनको अलग-अलग कलर कोड दिए गए हैं ताकि श्रद्धालु अपने वाहन के स्थान को आसानी से पहचान सकें।

पीले रंग का कोड ‘बावन बीधा पार्किंग’ के लिए, हरा रंग ‘सांवलपुरा पार्किंग’ के लिए, नीला रंग ‘लामिया रोड पार्किंग’ के लिए और गुलाबी रंग ‘दातारामगढ़ पार्किंग’ के लिए निर्धारित किया गया है। इन पार्किंग’स्थलों पर बड़े कलरफुल बैलून भी लगाए गए हैं ताकि दूर से ही स्थान की पहचान की जा सके। 

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