‘धार्मिक स्वतंत्रता’ के नाम पर दूसरों की आस्था आहत करने की अनुमति नहीं : हाई कोर्ट

Edited By Updated: 07 Jul, 2026 10:48 AM

calcutta high court

कलकत्ता हाई कोर्ट ने सोशल मीडिया पर पोस्ट की वजह से एक व्यक्ति की सहायक प्राध्यापक पद पर नियुक्ति को रद्द करते हुए टिप्पणी की कि किसी व्यक्ति को अपने धर्म को मानने का अधिकार है, लेकिन इसे दूसरों की आस्था को ठेस पहुंचाने की इजाजत नहीं माना जा सकता।

कोलकाता (एजैंसी): कलकत्ता हाई कोर्ट ने सोशल मीडिया पर पोस्ट की वजह से एक व्यक्ति की सहायक प्राध्यापक पद पर नियुक्ति को रद्द करते हुए टिप्पणी की कि किसी व्यक्ति को अपने धर्म को मानने का अधिकार है, लेकिन इसे दूसरों की आस्था को ठेस पहुंचाने की इजाजत नहीं माना जा सकता।

अदालत ने यह फैसला पश्चिम बंगाल के नरेंद्रपुर स्थित रामकृष्ण मिशन कॉलेज की उस याचिका पर दिया, जिसमें 4 सितंबर, 2025 को तमाल दासगुप्ता को संस्थान में अंग्रेजी का सहायक प्राध्यापक नियुक्त करने के एकल पीठ के आदेश को चुनौती दी गई थी। 

न्यायमूर्ति देबांग्सु बसाक और न्यायमूर्ति मोहम्मद शब्बर रशीदी की खंडपीठ ने माना कि उम्मीदवार के सोशल मीडिया पोस्ट दूसरे धर्मों को मानने वालों की भावनाएं आहत करने वाले थे। पीठ ने इस तथ्य को संज्ञान में लिया कि तमाल दासगुप्ता ने अपने धर्म के अलावा दूसरे धर्मों के बारे में कड़े विचार व्यक्त किए थे। अदालत ने उम्मीदवार की दलील को अस्वीकार कर दिया कि कॉलेज द्वारा उन्हें नौकरी न देने के फैसले ने उनकी अभिव्यक्ति की आजादी और धर्म का पालन करने के मौलिक अधिकारों को प्रभावित किया है।  

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