चाणक्य नीति सूत्र: राजपुरुषों से संबंध मधुर रखें

Edited By Updated: 05 Dec, 2021 01:06 PM

chanakya niti in hindi

आचार्य चाणक्य ने अपने नीति सूत्र में विभिन्न नीतियों के बारे में बताया है। कहा जाता है वर्तमान समय में जो व्यक्ति इन नीतियों को अपने जीवन में अपनाता हैै उसे जीवन में सफलता तो मिलती है

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
आचार्य चाणक्य ने अपने नीति सूत्र में विभिन्न नीतियों के बारे में बताया है। कहा जाता है वर्तमान समय में जो व्यक्ति इन नीतियों को अपने जीवन में अपनाता हैै उसे जीवन में सफलता तो मिलती है साथ ही साथ उस व्यक्ति का समाज में मान-सम्मान बढ़ता है। तो आइए जानते हैं आचार्य चाणक्य की कुछ खास नीतिया- 

चाणक्य नीति श्लोक-
रिक्तहस्तो न राजानमभिगच्छेत्।
भाव : राजा को जो उपहार दिया जाता है वह छोटा हो या बड़ा, देश के ही काम आता है। राजा उसे अपने ऊपर खर्च नहीं कर सकता। यही स्थिति गुरु और देवता की भी है। यदि आपके पास देने को कुछ नहीं है तो आप एक फूल ही भेंट करके मर्यादा की रक्षा कर सकते हैं।

चाणक्य नीति श्लोक-
गुरुं च दैवं च।
भाव : गुरु और देवता के पास भी खाली हाथ नहीं जाना चाहिए। गुरु विद्या का दान देने वाला है और देवता धर्म में प्रवृत्त करता है। दोनों ही प्रतिदान के अधिकारी हैं। 

चाणक्य नीति श्लोक-
न राज्ञ: परं दैवतम्।
भाव : प्राचीन काल में राजा को देवता का अंश कहा जाता था। देवता का कार्य धर्म का पालन करना और करवाना होता है। वह लोकहित के कार्य करता था इसलिए राजा को महान देवता माना गया है। 

चाणक्य नीति श्लोक-
पुत्रे गुणवति कुटु बिन: स्वर्ग:।
भाव : इस संसार में ‘सुख’ और ‘दुख’ अर्थात ‘स्वर्ग’ और ‘नर्क’ यहीं पर हैं। यदि किसी परिवार में एक गुणी पुत्र उत्पन्न हो जाता है तो वह सारे परिवार को सुख अर्थात स्वर्ग की भावना से भर देता है। अत: अपने पुत्र को गुणवान और सदाचारी बनाने का प्रयत्न करना चाहिए।

चाणक्य नीति श्लोक-
न चक्षुषापि राजधनं निरीक्षेत्।।
भाव : राजा का धन जनता का धन होता है। उसे लोकहित और लोक रक्षा के लिए खर्च किया जाता है। उस पर बुरी दृष्टि डालना प्रजा के साथ धोखा करना है। कहीं-कहीं इस सूत्र में ‘राजधनं’ के स्थान पर ‘राजानं’ भी आता है, तब इसका अर्थ होगा कि राजा को कभी सीधी आंखों से नहीं देखना चाहिए। इसे राजा के स मुख बेअदबी की संज्ञा दी जाती है।

चाणक्य नीति श्लोक-
राजपुरुषै: संबंधं कुर्यात्।
भाव : राजपुरुष से संबंध बनाए रखने से लाभ ही लाभ होता है। अपने कार्य तो सिद्ध होते ही हैं, दूसरों के कार्य भी कराए जा सकते हैं। 

Related Story

    img title
    img title

    Be on the top of everything happening around the world.

    Try Premium Service.

    Subscribe Now!