Edited By Niyati Bhandari,Updated: 02 Jul, 2026 02:32 PM

Jagannath Rath Yatra History: जानें क्यों निकाली जाती है जगन्नाथ रथयात्रा? कुरुक्षेत्र में राधा रानी और श्रीकृष्ण के मिलन की वो कथा जिसने भगवान को बना दिया 'जगत का नाथ'।
Jagannath Rath Yatra 2026: भारतीय संस्कृति और भक्ति परंपरा में भगवान श्रीकृष्ण का सबसे दयालु और ममतामयी स्वरूप 'भगवान जगन्नाथ' को माना जाता है। जगन्नाथ का अर्थ है- जगत के नाथ, जो अपने विशाल नेत्रों और पसारी हुई बांहों से हर भक्त को अपने आलिंगन में लेने के लिए आतुर रहते हैं। जगन्नाथ रथयात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह भक्त और भगवान के अटूट मिलन का जीवंत उत्सव है।

पौराणिक रहस्य: कुरुक्षेत्र से वृंदावन की ओर वापसी की चाह
इस महायात्रा की जड़ें लगभग 5000 वर्ष पूर्व द्वापर युग की एक भावुक घटना से जुड़ी हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान कृष्ण द्वारिका में निवास कर रहे थे, तब सूर्य ग्रहण के अवसर पर समस्त यदुवंशी कुरुक्षेत्र के समन्त पंचक तीर्थ पर एकत्रित हुए। वहां वृंदावन से नंद बाबा के नेतृत्व में राधा रानी और गोपियां भी कृष्ण के दर्शन के लिए पहुंचीं।
वर्षों के वियोग के बाद राधा रानी ने कृष्ण को देखा, लेकिन कुरुक्षेत्र की राजसी चकाचौंध उनके प्रेम में बाधा बन रही थी। वह अपने 'कान्हा' को फिर से वृंदावन की उन्हीं कुंज गलियों में देखना चाहती थीं। राधा रानी की इसी व्याकुलता और निमंत्रण को स्वीकार कर जब कृष्ण, बलराम और सुभद्रा रथ पर सवार हुए, तो प्रेम में मग्न ब्रजवासियों ने रथ के घोड़ों को खोल दिया और स्वयं घोड़ों की जगह जुत गए।

भक्त बने 'घोड़े' और कहलाए 'जगन्नाथ'
भक्तों का ऐसा अभूतपूर्व प्रेम देख भगवान भावविभोर हो गए। जब भक्तों ने स्वयं रथ खींचना शुरू किया, तब पहली बार भगवान को 'जगन्नाथ' (जगत के स्वामी) के नाम से पुकारा गया। भगवान ने प्रसन्न होकर कहा कि जब भक्त ही उनके दास (घोड़े) बन गए हैं, तो वे जहां चाहें उन्हें ले जा सकते हैं। यही वह लीला है जो आज 'जगन्नाथ रथयात्रा' के रूप में पूरी दुनिया में मनाई जाती है।
