Gayatri Jayanti: गायत्री मां के 5 मुख देंगे 5 महालाभ, हाथ से जानें न दें ये खास मौका

Edited By Niyati Bhandari, Updated: 10 Jun, 2022 08:25 AM

gayatri jayanti

जेष्ठ मास की दशमी तिथि को मां गायत्री की जयंती के रूप में मनाया जाता है। मां गायत्री को वेदमाता कहा गया है। वेदों और शास्त्रों के अनुसार संपूर्ण ब्रह्मांड के ज्ञान वेदों शास्त्रों की उत्पत्ति मां गायत्री से हुई है।

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Gayatri Jayanti 2022: जेष्ठ मास की दशमी तिथि को मां गायत्री की जयंती के रूप में मनाया जाता है। मां गायत्री को वेदमाता कहा गया है। वेदों और शास्त्रों के अनुसार संपूर्ण ब्रह्मांड के ज्ञान वेदों शास्त्रों की उत्पत्ति मां गायत्री से हुई है। मंत्रों में सर्वश्रेष्ठ मंत्र गायत्री मंत्र के जप से सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है, परम शक्ति वाहन इस मंत्र का जाप सभी देवता व ऋषि मुनि करते थे। प्राचीन शास्त्रों के अनुसार देवी गायत्री शक्ति व ऊर्जा की परम स्रोत रही हैं, उनकी ध्यान-साधना करने पर परम ज्ञान की प्राप्ति होती है। गायत्री जयंती के शुभ अवसर पर देवी के परम स्वरूप का ध्यान व साधना करने से जातक व मनुष्य जाति का परम कल्याण होता है। देवी का अलौकिक पंचमुखी रूप अत्यंत शक्तिशाली और अनेक प्रकार के सुख प्रदान करने वाला है। देवी का पंचमुखी रूप हमारे शरीर के पंच तत्वों को दर्शाता है। इनके स्वरूप का ध्यान करने से शरीर के पांचों तत्व जागृत व संतुलित हो जाते हैं। मानव शरीर इन्हीं पांच तत्वों की ऊर्जा से चलता है और इन्हीं पांच तत्वों पर हमारे जीवन की अलग-अलग गतिविधियां निर्भर करते हैं। इन्हीं पांच तत्वों से हम अपने जीवन के योग मोक्ष जैसी जरूरतों को पूरा कर सकते हैं। गायत्री जयंती के शुभ अवसर पर देवी की विधि-विधान से पूजा-साधना करने से अपने शरीर के तत्वों का सही संचार भी किया जा सकता है।

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Gayatri mantra upay: सूर्योदय के समय गायत्री मंत्र का उच्चारण पूरे ऊंचे स्वर में और गुंजन की ध्वनि पैदा करते हुए करने से अत्याधिक लाभ मिलता है। इसके पश्चात देवी गायत्री के चित्र पर धूप, दीप और नैवेद्य चढ़ाकर उन्हें प्रणाम करें। ब्रह्मांड की ऊर्जा का प्रमुख स्रोत देवी के इस चित्र का कल्पना सूर्य के अंदर करते हुए उन्हें प्रणाम करें।

आज के दिन रुद्राक्ष व स्फटिक की माला पर गायत्री मंत्र का जाप करने के पश्चात उस माला को धारण करने से शरीर के अंदर की ब्लॉकेज नष्ट होती है।

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गायत्री मंत्र में ही देवी गायत्री की शक्तियों का वास माना जाता है। यह 24 अक्षरों के मंत्र में 24 देवताओं का वास होने की मान्यता है इसलिए इस मंत्र का उच्चारण करते समय अपने सामने जल का कलश जन्म स्थान अवश्य रखें। इसके पश्चात ये प्रसाद अपने घर वालों को बांट दें।

अपने घर में पड़ी पुस्तकों विज्ञान के स्रोतों का आज के दिन पूजन अवश्य करें, बच्चों को भी अपनी पुस्तकों का पूजन करने के लिए प्रेरित करें।

आज के दिन देवी गायत्री को पांच अलग-अलग प्रकार के फलों, पकवानों, रसों का भोग लगाएं। ऐसा करने से पंचमहाभूत पांच प्रकार के आर्थिक प्रगति का वरदान आपको प्राप्त होगा। अनार, आवंला, केला, नारियल एवं मेवे का भोग अवश्य लगाएं।

नीलम
8847472411 

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