आखिर मां दुर्गा के हाथ में कैसे आया भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र ? पढ़ें महिषासुर वध से जुड़ी है ये कथा

Edited By Updated: 23 Mar, 2026 11:45 AM

goddess durga story

सनातन धर्म में मां दुर्गा को शक्ति का साक्षात स्वरूप माना गया है, जो न केवल ममतामयी हैं, बल्कि अधर्म का नाश करने वाली महायोद्धा भी हैं। जब भी हम मां दुर्गा के भव्य स्वरूप का दर्शन करते हैं, तो उनके हाथों में सुसज्जित दिव्य अस्त्र-शस्त्र हमें सुरक्षा...

Goddess Durga story : सनातन धर्म में मां दुर्गा को शक्ति का साक्षात स्वरूप माना गया है, जो न केवल ममतामयी हैं, बल्कि अधर्म का नाश करने वाली महायोद्धा भी हैं। जब भी हम मां दुर्गा के भव्य स्वरूप का दर्शन करते हैं, तो उनके हाथों में सुसज्जित दिव्य अस्त्र-शस्त्र हमें सुरक्षा का अहसास कराते हैं। लेकिन आपने कभी सोचा है कि भगवान विष्णु का सबसे घातक अस्त्र, सुदर्शन चक्र, शांत स्वभाव वाली देवी के हाथों में कैसे पहुंचा। यह कथा केवल एक युद्ध की कहानी नहीं है, बल्कि यह ब्रह्मांड की रक्षा के लिए सभी देवताओं के एकजुट होने का प्रमाण है। जब महिषासुर के आतंक से स्वर्ग का सिंहासन डोलने लगा और स्वयं त्रिदेव ने अपनी सामूहिक ऊर्जा से एक महाशक्ति को जन्म दिया, तब उस देवी को अजेय बनाने के लिए देवताओं ने अपने सबसे शक्तिशाली अंश उन्हें दान किए थे। विष्णु पुराण और देवी भागवत पुराण के अनुसार, सुदर्शन चक्र का मां दुर्गा के हाथों में आना एक ऐसी घटना थी जिसने युद्ध की दिशा ही बदल दी। तो आइए जानते हैं उस रोमांचक क्षण के बारे में जब जगत के पालनहार ने अपनी सबसे बड़ी शक्ति एक नारी शक्ति को सौंप दी और कैसे यह अस्त्र महिषासुर के अंत का मुख्य कारण बना।

Goddess Durga story

महिषासुर का आतंक और मां दुर्गा का प्राकट्य
कथा के अनुसार, जब असुर राज महिषासुर ने ब्रह्मा जी से 'अजेय' होने का वरदान प्राप्त कर लिया, तो उसने स्वर्ग पर आक्रमण कर इंद्र देव और अन्य देवताओं को वहां से खदेड़ दिया। महिषासुर को यह वरदान था कि उसका वध केवल एक 'स्त्री' के हाथों ही संभव था, जिसके कारण वह स्वयं को अमर समझने लगा था। हारे हुए देवता जब भगवान विष्णु और महादेव की शरण में पहुंचे, तो देवताओं के कष्ट सुनकर ब्रह्मा, विष्णु और महेश के मुख से एक दिव्य तेज पुंज प्रकट हुआ। सभी देवताओं का वह तेज मिलकर एक अत्यंत सुंदर और शक्तिशाली शक्ति के रूप में बदल गया, जिन्हें हम मां दुर्गा के नाम से जानते हैं।

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देवी दुर्गा को महिषासुर से युद्ध करने के लिए सभी देवताओं ने अपनी शक्तियां और अस्त्र भेंट किए। भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र में से एक चक्र निकालकर देवी दुर्गा को प्रदान किया। महादेव ने अपने त्रिशूल की शक्ति उन्हें सौंपी। देवराज इंद्र ने अपना वज्र और ऐरावत हाथी का घंटा देवी को दिया। वरुण देव ने पावन शंख भेंट किया। काल देव ने तलवार, अग्नि देव ने शक्ति, और हिमालय ने सवारी के लिए सिंह भेंट किया। मां दुर्गा के आठ या दस हाथों में सुदर्शन चक्र का होना इस बात का प्रतीक है कि उनके पास सृष्टि को चलाने और विनाश करने की संपूर्ण शक्ति है। युद्ध के दौरान, इसी चक्र और अन्य अस्त्रों की सहायता से देवी ने महिषासुर की विशाल सेना का संहार किया और अंततः उस अधर्मी असुर का वध कर दिया।

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