Edited By Niyati Bhandari,Updated: 26 Aug, 2026 01:26 PM

Lord Hayagriva Jayanti 2026: हयग्रीव जयंती पर जानें भगवान हयग्रीव की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र और इसका महत्व। भगवान विष्णु के इस अश्व-ग्रीव अवतार की आराधना से पाएं बल, बुद्धि और मानसिक शांति।
Hayagriva Jayanti 2026: हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। इसी पावन श्रृंखला में सावन मास की पूर्णिमा के दिन हयग्रीव जयंती का पर्व अत्यंत श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह पवित्र पर्व 27 अगस्त बृहस्पतिवार को मनाया जाएगा।

भगवान हयग्रीव को सृष्टि के पालनकर्ता श्री हरि विष्णु के 24 दिव्य अवतारों में से एक माना गया है। हयग्रीव भगवान का स्वरूप अत्यंत अनूठा और अलौकिक है। उनका सिर घोड़े (अश्व) का और धड़ मनुष्य का है। भगवान विष्णु ने यह अवतार मधु और कैटुभ नामक दो राक्षसों से ब्रह्मांड की रक्षा के लिए लिया था, जिन्होंने वेदों को चुरा लिया था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हयग्रीव भगवान ने वेदों के विकास में अपना विशेष योगदान दिया था। इसी वजह से उन्हें ज्ञान का देवता भी कहा जाता है। आइए जानते हैं इस विशिष्ट अवतार की पूजा विधि और महत्व-
भगवान हयग्रीव से पहले करें श्री गणेश की पूजा
हयग्रीव भगवान की पूजा करते समय दिशा का ध्यान हमेशा रखना चाहिए। पूर्व और उत्तर दिशा की ओर मुख करके उनकी आराधना करें। शुरुआत में श्री गणेश की धूप, दीप, अक्षत से पूजा करें और बप्पा को मोदक या फिर लड्डू का भोग लगाएं।

Hayagriva Jayanti puja vidhi हयग्रीव व्रत की पूजा विधि
सबसे पहले भगवान हयग्रीव को जल से स्नान कराएं। अगर किसी के पास भगवान हयग्रीव की तस्वीर नहीं है तो वो श्री हरि की भी पूजा कर सकता है। इसके बाद फूलों की माला पहनाएं और उसके बाद तिलक करें। तिलक लगाते समय इस मंत्र का जाप करें:
Mantra मंत्र: ॐ नमो भगवते आत्मविशोधनाय नमः
हयग्रीव जयंती महत्व: माना जाता है भगवान हयग्रीव की पूजा करने से व्यक्ति को बल और बुद्धि का आशीर्वाद मिलता है और स्मरण शक्ति भी तेज हो जाती है। इसी के साथ बता दें कि इनकी पूजा करने से व्यक्ति को किसी भी तरह का कोई भी मानसिक रोग नहीं छू सकता और शत्रुओं के भय से मुक्ति मिलती है।
