Edited By Niyati Bhandari,Updated: 25 Aug, 2026 01:21 PM

Kriti Sanon Raksha Bandhan Ad: बॉलीवुड अभिनेत्री कृति सेनन के नए ज्वैलरी विज्ञापन में कुत्ते को राखी बांधने पर बवाल मच गया है। काशी के विद्वानों ने इसे सनातन परंपरा और रक्षाबंधन के खिलाफ बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई है। पढ़ें पूरी खबर।
Kriti Sanon Raksha Bandhan Ad: रक्षाबंधन आने को कुछ दिन बाकी हैं इसलिए इससे संबंधित विज्ञापनों की होड़ सी लगी हुई है। ऐसे में एक ज्वैलरी ब्रांड का नया विज्ञापन विवादों के घेरे में आ गया है। इस विज्ञापन में दिखाया जा रहा है की बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री कृति सेनन एक पालतू कुत्ते को राखी बांध रही है। सोशल मीडिया पर इस ऐड को लेकर बड़ा बवाल मचा गया है। जहां यूजर्स में तीखी बहस छिड़ गई है, सभी अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं देने में लगे हुए हैं। दूसरी तरफ भोले बाबा की नगरी काशी के धर्मशास्त्रियों और विद्वानों ने कड़े शब्दों में निंदा जताई है। विद्वानों का साफ कहना है कि धार्मिक परंपराओं के साथ इस तरह का खिलवाड़ सनातन संस्कृति के बिल्कुल विपरीत है।
इसे विज्ञापन को 'सनातन विरुद्ध' करार दिया जा रहा है। रक्षाबंधन एक बेहद पवित्र धार्मिक पर्व है, जिसकी परंपरा सदियों से निभाई जा रही है। आज के बदलते लाइफस्टाइल के मध्य इस त्योहार का मूल स्वरूप पूरी तरह से बिगड़ गया है। कुत्तों को राखी बांधना अमर्यादित काम है। इसे कभी भी धर्म सम्मत नहीं माना जा सकता।
रक्षा सूत्र को सामान्य बोलचाल की भाषा में राखी कहा जाता है जो वेद के संस्कृत शब्द ‘रक्षिका‘ का अपभ्रंश हैं। इसका अर्थ है- रक्षा करना, रक्षा करने को तत्पर रहना या रक्षा करने का वचन देना। धागा केवल अचेतन वस्तु न होकर सिल्क या सूत के कई तारों को पिरोकर तैयार होता है। यह भावनात्मक एकता का प्रतीक है इसलिए इसे पवित्र माना जाता है।
बहुत साल पहले पुरोहित अपने यजमानों को और गुरु अपने शिष्यों को रक्षा सूत्र बांधते थे। रक्षासूत्र मात्र एक धागा नहीं है। वह एक ऊर्जात्मक संकल्प बिंदु है जो दो आत्माओं को धर्म, संकल्प और प्रेम से बांधता है। रक्षा बंधन केवल भाई-बहन का रिश्ता नहीं यह किसी भी पवित्र संबंध की ऊर्जा को संरक्षित करने का अवसर है। यह गुरु-शिष्य, आचार्य-विद्यार्थी, देवता-भक्त, राजा-प्रजा और यहां तक कि आत्मा-परमात्मा के बंधन का प्रतीक भी है।

राखी बांधते समय मंत्रों का उच्चारण विशेष आवृत्ति की तरंगों को पैदा करता है, जो अपने संपर्क में आने वाली सभी चीजों पर सकारात्मक प्रभाव डालती हैं। जब रक्षा सूत्र बांधा जाता है तो यह मंत्र उच्चारित किया जाता है -
" ॐ एन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबल: तेन त्वा मनुबधनानि रक्षे माचल माचल "
अर्थात- जिस रक्षा सूत्र से महान शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बांधा गया था, उसी रक्षा बन्धन से मैं तुम्हें बांधती हूं जो तुम्हारी रक्षा करेगा।
क्या शास्त्रों में है कुत्ते को राखी बांधने का विधान?
सनातन धर्म के प्रमुख और पारंपरिक धर्मग्रंथों की बात करें, तो रक्षाबंधन की पारंपरिक विधि में कहीं भी पालतू जानवरों या कुत्ते को राखी बांधने का कोई विधान या अनिवार्य धार्मिक परंपरा नहीं बताई गई है। जानवरों से स्नेह और करुणा रखना धर्मसम्मत है, लेकिन उसे रक्षाबंधन जैसे शास्त्रीय उत्सव के पारंपरिक स्वरूप में जबरन फिट करना किसी भी तरह से तर्कसंगत नहीं है। यही वजह है कि काशी के विद्वान इस विज्ञापन के खिलाफ मुखर हो गए हैं।
