कैसे आई नेपाल में इतनी खतरनाक बाढ़? सैटेलाइट तस्वीरों से सामने आई वजह, अब तक 157 लोगों की मौ'त

Edited By Updated: 27 Aug, 2026 12:49 AM

how did such a dangerous flood occur in nepal

नेपाल में बुधवार सुबह अचानक आई भीषण बाढ़ ने कुछ ही घंटों के भीतर भारी तबाही मचा दी है। पानी के इस भयानक और तेज बहाव की चपेट में आने से सड़कें, पुल, मकान और कई जलविद्युत परियोजनाएं पूरी तरह तबाह हो गई हैं। इस आपदा में सबसे ज्यादा नुकसान तिब्बत सीमा...

काठमांडूः नेपाल में बुधवार सुबह अचानक आई भीषण बाढ़ ने कुछ ही घंटों के भीतर भारी तबाही मचा दी है। पानी के इस भयानक और तेज बहाव की चपेट में आने से सड़कें, पुल, मकान और कई जलविद्युत परियोजनाएं पूरी तरह तबाह हो गई हैं। इस आपदा में सबसे ज्यादा नुकसान तिब्बत सीमा से सटे रसुवा जिले में दर्ज किया गया है। अब तक मिली जानकारी के अनुसार, इस सैलाब के कारण अब तक 157 लोगों की मौत, जबकि सैंकड़ों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि इस भयानक बाढ़ के आने से पहले इलाके में कोई बेहद भारी बारिश नहीं हुई थी।

सैटेलाइट तस्वीरों ने खोला रहस्य: बिना बारिश के कैसे आया यह सैलाब?

आखिर बिना भारी बारिश के इतनी बड़ी तबाही कैसे आई? इस रहस्य पर से पर्दा 'प्लैनेट लैब्स' (Planet Labs) द्वारा जारी की गई सैटेलाइट तस्वीरों के शुरुआती विश्लेषण से उठा है। तस्वीरों से संकेत मिलते हैं कि नेपाल-चीन सीमा के समीप रसुवागढ़ी सीमा चौकी से करीब 20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में पहाड़ों से बर्फ और चट्टानों का एक बहुत बड़ा भूस्खलन हुआ था।

इस भूस्खलन का सीधा असर ल्हेंदे नदी पर पड़ा। भारी मात्रा में पहाड़ का हिस्सा गिरने से नदी का रास्ता रुक गया, जिससे उसके पीछे धीरे-धीरे भारी मात्रा में पानी जमा होने लगा और एक प्राकृतिक बांध (कृत्रिम झील) का निर्माण हो गया। जब पानी का दबाव अत्यधिक बढ़ गया, तो यह प्राकृतिक बांध अचानक टूट गया और जमा हुआ पानी एक बेहद तेज लहर के रूप में नीचे की ओर बह निकला। यही पानी आगे चलकर भोटेकोशी नदी में मिल गया, जिससे नदी का जलस्तर अचानक खतरनाक सीमा तक बढ़ गया। काठमांडू यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और जलवायु शोधकर्ता रिजान भक्त कायस्थ ने भी अपने प्रारंभिक आकलन में इसकी पुष्टि की है कि बर्फीले हिमस्खलन के कारण ही नदी का प्रवाह अवरुद्ध हुआ था।

भूकंप ने भी बढ़ाया तबाही का शक

इस घटना के पीछे एक बड़े प्राकृतिक झटके यानी भूकंप का भी सीधा कनेक्शन सामने आ रहा है। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, घटना वाले दिन सुबह करीब 8:37 बजे तिब्बती इलाके में 4.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। इस भूकंप का केंद्र गोसाईंकुंड से लगभग 47 किलोमीटर उत्तर की ओर था। इस भूकंप के कुछ ही समय बाद, लगभग सुबह 9:00 बजे, तिब्बत की तरफ से भोटेकोशी नदी में पानी का बेहद तेज बहाव आने की खबर सामने आई।

नेपाल के इन जिलों में मची तबाही, संभलने का भी नहीं मिला मौका

अचानक आए इस फ्लैश फ्लड (Flash Flood) का सबसे भयंकर रूप रसुवा और धादिंग जैसे तिब्बत सीमा से लगे जिलों के साथ-साथ नुवाकोट जिले में देखा गया। पानी की रफ्तार इतनी तेज और अप्रत्याशित थी कि लोगों को अपनी जान बचाने और संभलने का मौका तक नहीं मिल सका। कई घर और जलविद्युत परियोजनाएं पूरी तरह से पानी के वेग में बह गईं।

 

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