Indian culture: भारतीय संस्कृति में अंक 10 है बेहद खास, शायद नहीं जानते होंगे आप

Edited By Niyati Bhandari,Updated: 20 May, 2022 10:04 AM

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भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से ही हमारी जीवन पद्धति, साहित्य, धर्म और संस्कृति का आपस में गहरा संबंध रहा है। ठीक उसी प्रकार से दिशा, द्रव्य, अवस्था, देवता, धर्म, संस्कार, वृक्ष, व्यसन व औषधियां 10 अंक में रही हैं। इन सबका विस्तृत विवरण इस प्रकार...

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ

Indian culture: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से ही हमारी जीवन पद्धति, साहित्य, धर्म और संस्कृति का आपस में गहरा संबंध रहा है। ठीक उसी प्रकार से दिशा, द्रव्य, अवस्था, देवता, धर्म, संस्कार, वृक्ष, व्यसन व औषधियां 10 अंक में रही हैं। इन सबका विस्तृत विवरण इस प्रकार है :

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Indian culture values and traditions: धर्म के 10 लक्षण हैं तो जीवन की अवस्थाएं भी 10 हैं, हमारे यहां 10 कर्म या 10 संस्कारों का चलन रहा है। हमारे शरीर के 10 द्वार हैं। दिशाएं 10 हैं, तो इन 10 दिशाओं की रक्षा करने वाले 10 देवता भी हैं। रावण के 10 मुख होने के कारण उसे दशानन, दशसिर और दशास्य जैसे नाम दिए गए तो रावण का संहार करने वाले श्री राम को दशारयजित, दशकुठारि, दशकंठजित आदि कहा गया।

चंद्र मास के दोनों पक्ष की दसवीं तिथि दशमी कहलाती है। दशमी से पर्व भी जुड़े हैं जैसे विजयदशमी, सुगंध दशमी, गंगा दशहरा और जन्म कुंडली के दशम भाव से जीवन में मिलने वाले सम्मान, पद, व्यापार, कर्म, पिता और आज्ञा आदि का विचार किया जाता है।


पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, अग्नि, नैऋत्य, वायु, ईशान, अध: और उर्ध्व 10 दिशाएं हैं। पूर्व दिशा के देवता इंद्र, पश्चिम दिशा के वरुण, उत्तर के देवता कुबेर, अग्निकोण के अग्नि, दक्षिण दिशा के यम, नैऋत्य कोण के देवता नैऋत और अध: दिशा के देवता अनंत हैं। इसी प्रकार से वायु के मारूत और उर्ध्व दिशा के ब्रह्म हैं।

शरीर के दस द्वार : 2 कान, 2 आंख, 2 नासाधिक, मुख, गुदा, सिंग और ब्रह्मांड हैं। 10 सुगंधों के मेल से बनने वाला धूप जो पूजा में जलाया जाता है, उसमें 10 प्रकार के द्रव्य मिलाए जाते हैं। ये द्रव्य हैं शिला रस, गुग्गल, चंदन, जटामासी, लोबान, राल, रवस, नख, भीमसैनी, कपूर और कस्तूरी।

मनुष्य का जीवन 10 अवस्थाओं में बंटा है। ये अवस्थाएं हैं- गर्भ वास, जन्म, बाल्य, कौमार, पोगंड यानी पाव से 16 वर्ष तक की आयु का बालक, ख्यौवन, स्थाविर्य, जरा, प्राणरोधक और नाश।

जीवन और साहित्य से आगे धर्म की ओर बढ़ें तो अनेक देवी-देवता 10 के वर्ग में मिल जाएंगे। भगवान विष्णु के मुख्य अवतार दशावतार जाने जाते हैं।

ये है मत्स्य, कूर्म, वराह, नृसिंह, वामन, परशुराम, राम, बलराम, बुद्ध और कल्की। ये 10 देव मूर्तियां जिनकी शक्ति की लोग उपासना करते हैं, दश महाविद्या कहलाती हैं। दस महाविद्याएं हैं काली, तारा, छिन्नमस्ता, षोडशी, भुवनेश्वरी, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी व कमला।

भगवान बुद्ध को 10 बल प्राप्त थे इसलिए वह दशबल कहलाए। ये बल हैं दान, शील, क्षमा, वीर्य, ध्यान, प्रज्ञा, बल, उपाय, प्रणिधि और ज्ञान। धृति, क्षमा, दम, अस्त्ये, शौच, इंद्रिय, निग्रह, घी, विद्या, सत्य और अक्रोध - धर्म के 10 लक्षण हैं।

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10 संस्कार और 10 व्यसन
गर्भाधान संस्कार से लेकर विवाह तक 10 संस्कारों का प्रचलन रहा है। इन संस्कारों को 10 कर्म भी कहते हैं। दश कर्म हैं - गर्भाधान, पुंसवन, सीमन्तोन्नयन, जातकर्म, नामकरण, निष्क्रमण, अन्नप्राशन, चूड़ाकर्म, विद्यारंभ, कर्णवेध, यज्ञोपवीत, वेदारम्भ, केशान्त, समावर्तन, विवाह तथा अन्त्येष्टि। तंत्र के अनुसार 10 वृक्षों का कुल दशकुल वृक्ष कहलाता है।

10 औषधियां काढ़े के काम आती हैं- अडसा, गुर्च, पित्तपाड़ा, चिरायता, नीम की छाल, जल भंग, हरड़, बहेड़ा, आंवला और कुलथी।

10 वनस्पतियों की जड़ें दशमूल भी उपयोगी हैं। दशमूल हैं सखिन, पिठवन, छोटी कटाई, बड़ी कटाई, गोखरू, बेल, पाठा, गंभारी, ननियारी, सोनापाठा जो आयुर्वेद औषधि के रूप में उपयोगी हैं। अत: अंक 10 की महिमा अपूर्व होकर रहस्यमयी भी है। 

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