जैन समुदाय को 2,000 से अधिक ‘पांडुलिपियां’ लौटाएगा ब्रिटेन

Edited By Updated: 17 May, 2026 10:44 AM

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ब्रिटेन के प्रमुख संग्रहालयों में से एक ‘वैलकम कलैक्शन’ ने दक्षिण एशिया के बाहर मौजूद जैन पांडुलिपियों के सबसे बड़े संग्रह को लौटाने की ‘ऐतिहासिक’ पहल की घोषणा की।

लंदन (प.स.): ब्रिटेन के प्रमुख संग्रहालयों में से एक ‘वैलकम कलैक्शन’ ने दक्षिण एशिया के बाहर मौजूद जैन पांडुलिपियों के सबसे बड़े संग्रह को लौटाने की ‘ऐतिहासिक’ पहल की घोषणा की। लंदन स्थित इस संग्रहालय में एक सदी से अधिक समय से रखी गई 2000 से अधिक पांडुलिपियों की वापसी का फैसला यहां स्थित ‘इंस्टीच्यूट ऑफ जैनोलॉजी’ के साथ संवाद और सहयोग के बाद लिया गया है।

पांडुलिपियों के इस संग्रह में 15वीं शताब्दी की चित्रित पांडुलिपियों से लेकर 19वीं शताब्दी के दुर्लभ ग्रंथ शामिल हैं। इनमें धर्म, साहित्य, चिकित्सा और संस्कृति से संबंधित सामग्री प्राकृत, संस्कृत, गुजराती, राजस्थानी और प्रारंभिक हिंदी लिपियों में उपलब्ध है। इनमें भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के नैतिक सिद्धांतों का एक प्रारंभिक और प्रभावशाली उदाहरण भी शामिल है, जिनसे महात्मा गांधी ने प्रेरणा ली थी और उन्होंने इसे लोकप्रिय बनाया। यह दस्तावेज भारत में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन की बुनियाद की तीखी आलोचना करता है।

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