Edited By Sarita Thapa,Updated: 30 Aug, 2026 11:00 AM

कजरी तीज का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बहुत पवित्र और फलदायी माना जाता है। इस दिन माता पार्वती और देवों के देव महादेव की पूजा करने का विधान है। साथ ही इस दिन रात को चंद्र देव को अर्घ्य देने का भी बहुत खास महत्व है।
Kajari Teej 2026 Moon worship rituals : कजरी तीज का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बहुत पवित्र और फलदायी माना जाता है। इस दिन माता पार्वती और देवों के देव महादेव की पूजा करने का विधान है। साथ ही इस दिन रात को चंद्र देव को अर्घ्य देने का भी बहुत खास महत्व है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और संतान की खुशहाली की कामना करती हैं निर्जला व्रत रखती हैं। माना जाता है कि जब तक चंद्रमा को जल अर्पित न किए जाए, तब तक कजरी तीज का निर्जला व्रत पूरा नहीं माना जाता है। कुछ लोगों के मन में अक्सर यह सवाल बना रहता है कि कजरी तीज पर चंद्रमा को अर्घ्य क्यों देते हैं। तो आइए जानते हैं कि इसके धार्मिक महत्व के बारे में-
कजरी तीज पर चंद्र अर्घ्य का धार्मिक महत्व
शास्त्रों और ज्योतिष के अनुसार, चंद्रमा को मन और शीतलता का कारक माना जाता है। कजरी तीज पर चंद्रमा की पूजा से पति-पत्नि के रिश्ते में मधुरता, प्यार और विश्वास बना रहता है और पति को लंबी आयु प्राप्त होती है। साथ ही चंद्रमा भगवान शिव के मस्तक पर विभूषित हैं। चंद्र देव को जल अर्पित करने से महादेव और माता पार्वती दोनों का आशीर्वाद एक साथ प्राप्त होता है। ऐसा माना जाता है कि चंद्र देव की किरणें जीवन से तनाव और नकारात्मकता को दूर कर सुखी दांपत्य जीवन बनाए रखती है।

चंद्रमा को अर्घ्य देने की सही विधि
तांबे या पीतल के लोटे में शुद्ध जल भरें। इसमें थोड़ा सा कच्चा दूध, रोली, अक्षत और सफेद फूल मिलाएं।
रात्रि में चंद्रोदय के बाद हाथ में छलनी और पूजा की थाली लेकर अर्घ्य देने वाले स्थान पर जाएं। छलनी से चंद्रमा का दर्शन करें।
चंद्रमा की ओर देखते हुए लोटे से जल की धारा नीचे किसी साफ पात्र या गमले में गिराएं।
उसके बाद जल अर्पित करते समय चंद्रमा के मंत्रों का उच्चारण करें।
अर्घ्य देने के बाद अपनी ही जगह पर तीन बार घूमकर परिक्रमा करें और पूजा में हुई किसी भी गलती के लिए क्षमा मांगें।
इसके पश्चात छलनी से अपने पति का चेहरा देखें और उनके हाथों से जल ग्रहण करके अपना निर्जला व्रत खोलें।

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