शर्मनाकः नेपाल बाढ़ पीड़ितों ने मांगी मदद तो मिले गंदे कमेंट, बालेन सरकार ने ट्रोलर्स पर कसा शिकंजा

Edited By Updated: 07 Sep, 2026 01:08 PM

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नेपाल में बाढ़ पीड़ितों को सोशल मीडिया पर ट्रोल और अपमानित करने वालों के खिलाफ साइबर ब्यूरो ने 10 सदस्यीय टीम बनाई है। परिवार लापता परिजनों की तलाश में मदद मांग रहे थे, लेकिन उन्हें नफरत भरे कमेंट मिले। पुलिस बिना शिकायत भी पर्याप्त सबूत मिलने पर...

Kathmandu: नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद अपनों की तलाश में सोशल मीडिया पर मदद मांग रहे परिवारों को ट्रोल करने और अपमानजनक टिप्पणियां करने वालों के खिलाफ सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। नेपाल के साइबर ब्यूरो ने ऐसे सोशल मीडिया यूजर्स की पहचान और जांच के लिए 10 सदस्यीय विशेष टीम बनाई है। यह कदम प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की उस चेतावनी के बाद उठाया गया है, जिसमें उन्होंने बाढ़ पीड़ितों का मजाक उड़ाने या उन्हें और परेशान करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही थी।

 

अपनों की तलाश में पोस्ट पर मिले घिनौने कमेंट
26 अगस्त को नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में लोग अपने लापता परिजनों की तलाश के लिए सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं। परिवार अपने रिश्तेदारों की तस्वीरें और जानकारी साझा कर लोगों से मदद की अपील कर रहे हैं। लेकिन कुछ मामलों में इन भावुक अपीलों के जवाब में लोगों ने मजाक उड़ाने वाले, अपमानजनक और नफरत फैलाने वाले कमेंट किए। ‘द काठमांडू पोस्ट’ के मुताबिक, साइबर ब्यूरो अब ऐसे अकाउंट्स की प्रोफाइल तैयार कर रहा है और उनके पते तथा फोन नंबरों की पहचान करने की कोशिश कर रहा है।

 

बिना शिकायत भी होगी जांच
साइबर ब्यूरो के प्रवक्ता दिलीप कुमार गिरी ने बताया कि मामले की जांच के लिए 10 सदस्यीय टीम काम कर रही है। उन्होंने कहा कि बाढ़ से बचे लोगों को और मानसिक परेशानी देने वाले इस तरह के व्यवहार को रोकना जरूरी है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। खास बात यह है कि पीड़ित व्यक्ति की ओर से औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराए जाने के बावजूद पुलिस जांच शुरू कर सकती है, अगर उसके पास पर्याप्त सबूत हों। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने शनिवार को फेसबुक पर कहा था कि जो लोग दर्द में पड़े लोगों को नीचा दिखाते हैं या संवेदनशील समय में उनकी तकलीफ बढ़ाने की कोशिश करते हैं, वे अपराध कर रहे हैं। उन्होंने ऐसे लोगों के खिलाफ सरकार की ओर से कोई नरमी नहीं बरतने की चेतावनी दी थी।  हालांकि, प्रधानमंत्री की चेतावनी के बाद भी ऑनलाइन दुर्व्यवहार के मामले सामने आते रहे।

 

मदद की गुहार लगा रही महिला के वीडियो पर भी भद्दे कमेंट
रविवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया, जिसमें एक महिला छोटे बच्चे को गोद में लेकर अपने पति और अन्य रिश्तेदारों को खोजने के लिए मदद की अपील कर रही थी। रिपोर्ट के मुताबिक, इस वीडियो पर भी कुछ लोगों ने महिला के दर्द को समझने के बजाय मजाक उड़ाने और अपमान करने वाली टिप्पणियां कीं।  ऐसे मामलों ने बाढ़ के बाद पीड़ित परिवारों की मानसिक परेशानी को और बढ़ा दिया है। साइबर ब्यूरो ने इस मामले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार भी किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, बैतड़ी के बीरेंद्र मडई को शनिवार को काठमांडू में गिरफ्तार किया गया। उस पर बाढ़ से प्रभावित लोगों की जातीय पहचान को लेकर ऐसी टिप्पणियां करने का आरोप है, जिनसे जातीय तनाव भड़क सकता था।

 

नेपाल का साइबर कानून
नेपाल के Electronic Transactions Act, 2008 में ऑनलाइन दुर्व्यवहार और नफरत फैलाने वाली सामग्री के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है।कानून की धारा 47 इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से ऐसी सामग्री प्रकाशित या प्रदर्शित करने पर रोक लगाती है, जो 

  • नफरत या दुश्मनी को बढ़ावा देती हो,
  • जातीय या धार्मिक समुदायों के बीच संबंध बिगाड़ती हो,
  • किसी व्यक्ति को परेशान या अपमानित करती हो,
  • या अश्लील और अनुचित व्यवहार से जुड़ी हो।

 

दोष साबित होने पर 1 लाख नेपाली रुपये तक जुर्माना या पांच साल तक की जेल, या दोनों हो सकते हैं। दोबारा अपराध करने वालों के लिए ज्यादा सख्त सजा का प्रावधान है। गौरतलब है कि नेपाल में 26 अगस्त को तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के खिसकने से अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी। भोटेकोशी नदी में अचानक पानी और मलबे का सैलाब आया, जिसने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई इलाकों को तबाह कर दिया।ऐसे समय में जब हजारों परिवार अब भी लापता अपनों की तलाश कर रहे हैं, सोशल मीडिया पर किया गया मजाक या अपमान पीड़ितों के दर्द को और गहरा कर सकता है। 

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