Maa Durga Ke Vidai: सिंदूर खेला के साथ मां को दी विदाई

Edited By Updated: 21 Oct, 2026 05:04 PM

maa durga ke vidai

ढाक की गूंज, सिंदूर से रंगे चेहरे और नम आंखों में मां के फिर लौटने की आस। मंगलवार को राजधानी दिल्ली के दुर्गा पूजा पंडालों में ऐसा ही भावुक दृश्य देखने को मिला, जब भक्तों ने मां दुर्गा को विदाई देते हुए ‘मां अगले बरस तू जल्दी आना’ के जयकारे लगाए। कई...

नई दिल्ली (नवोदय टाइम्स): ढाक की गूंज, सिंदूर से रंगे चेहरे और नम आंखों में मां के फिर लौटने की आस। मंगलवार को राजधानी दिल्ली के दुर्गा पूजा पंडालों में ऐसा ही भावुक दृश्य देखने को मिला, जब भक्तों ने मां दुर्गा को विदाई देते हुए ‘मां अगले बरस तू जल्दी आना’ के जयकारे लगाए। कई दिनों तक भक्ति, उत्साह और उल्लास से सराबोर रहे दुर्गा पंडालों में विदाई के समय माहौल भावुक हो गया। चितरंजन पार्क, मिंटो रोड, कालीबाड़ी, तिमारपुर सहित राजधानी के विभिन्न इलाकों में आयोजित दुर्गा महोत्सव का समापन पूजा-अर्चना, सिंदूर खेला, कन्या पूजन और प्रतिमा विसर्जन के साथ हुआ।

सिंदूर खेला में झलकी बंगाली परंपरा: दुर्गा पूजा के अंतिम दिन कई पंडालों में महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ सिंदूर खेला में हिस्सा लिया। सुहागिन महिलाओं ने मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित कर उनके सुख, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की। इसके बाद एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर उत्सव की शुभकामनाएं दीं। लाल सिंदूर से रंगे चेहरों और पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं ने मां को विदाई दी। ढाक की थाप और शंखनाद के बीच मां दुर्गा की विदाई का यह दृश्य श्रद्धा और भावनाओं का अनूठा संगम बना।

चितरंजन पार्क से लेकर मिंटो रोड और कालीबाड़ी तक दुर्गा पूजा पंडालों में सुबह से ही भक्तों की आवाजाही बनी रही। भक्तों ने मां दुर्गा के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की प्रार्थना की। इसके बाद विधि-विधान के साथ प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए ले जाया गया। 

ढोल-नगाड़ों, भक्ति गीतों और जयकारों के बीच निकली विसर्जन यात्राओं में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। मां को विदा करते समय कई भक्त भावुक नजर आए। उनके चेहरों पर एक ओर विदाई का दुख था, तो दूसरी ओर अगले वर्ष मां के आगमन की प्रतीक्षा। दुर्गा महोत्सव के समापन के साथ ही राजधानी के पूजा पंडालों में अगले वर्ष मां के आगमन की प्रतीक्षा शुरू हो गई। 

भक्तों ने मां दुर्गा से फिर आने और सभी पर अपनी कृपा बनाए रखने की प्रार्थना की। ‘मां अगले बरस तू जल्दी आना’ के जयकारों के बीच विदाई का यह पल भक्ति, परंपरा और भावनाओं की यादगार तस्वीर छोड़ गया।

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