Edited By Sarita Thapa,Updated: 20 Oct, 2026 08:02 AM

दुर्गा अष्टमी के पावन अवसर पर कुरुक्षेत्र स्थित हरियाणा के एकमात्र शक्तिपीठ श्री देवीकूप मां भद्रकाली मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। सुबह से ही मां के दर्शन करने के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ने लगी।
Maa Bhadrakali Temple Kurukshetra Durga Ashtami : दुर्गा अष्टमी के पावन अवसर पर कुरुक्षेत्र स्थित हरियाणा के एकमात्र शक्तिपीठ श्री देवीकूप मां भद्रकाली मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। सुबह से ही मां के दर्शन करने के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ने लगी। श्रद्धालुओं ने मां भद्रकाली की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर मंदिर में कंजक पूजन किया गया। श्रद्धालुओं ने कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की और उन्हें भोजन करवाकर उपहार भेंट किए।
श्री देवीकूप मां भद्रकाली मंदिर का इतिहास माता सती से जुड़ा हुआ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब माता सती ने राजा दक्ष के यज्ञ में अपने प्राण त्याग दिए थे, तब भगवान शिव उनके पार्थिव शरीर को लेकर विचरण करने लगे। भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर को खंडित किया, जिसके बाद उनके अंग विभिन्न स्थानों पर गिरे और वहां शक्तिपीठ स्थापित हुए। मान्यता है कि कुरुक्षेत्र स्थित इस मंदिर में माता सती का दायां टखना गिरा था। इसी कारण यह स्थान प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है। मंदिर को श्री देवीकूप के नाम से भी जाना जाता है।
महाभारत काल से जुड़ी है घोड़ों की जोड़ी चढ़ाने की परंपरा
मां भद्रकाली मंदिर की एक विशेष परंपरा मन्नत पूरी होने पर घोड़ों की जोड़ी चढ़ाने की है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत युद्ध से पहले भगवान श्रीकृष्ण और पांडवों ने मां की आराधना कर विजय की कामना की थी। युद्ध में विजय प्राप्त करने के बाद घोड़े अर्पित किए जाने की मान्यता इस परंपरा से जुड़ी है। इसी आस्था के चलते आज भी श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने पर मां के दरबार में मिट्टी, चांदी, सोने तथा अन्य धातुओं से बने घोड़ों की जोड़ी चढ़ाते हैं। नवरात्र के दौरान मंदिर में विशेष धार्मिक उत्साह देखने को मिलता है। दुर्गा अष्टमी पर भी श्रद्धालुओं ने मां के दरबार में शीश नवाकर आशीर्वाद लिया और अपनी श्रद्धा प्रकट की।
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