Mangla Gauri Vrat 2026 : वैवाहिक जीवन में प्रेम और मधुरता बनाए रखना चाहते हैं तो पहले मंगला गौरी व्रत पर जरूर करें ये मंत्र जाप

Edited By Updated: 03 Aug, 2026 06:01 PM

mangla gauri vrat 2026

हिंदू धर्म में  जैसे सावन का महीना शिव जी की पूजा करने और उन्हें प्रसन्न करने के लिए बहुत खास माना जाता है, वैसे ही सावन का मंगलवार माता पार्वती की पूजा के लिए उत्तम माना जाता है। सावन के हर मंगलवार माता पार्वती को समर्पित मंगला गौरी व्रत रखा जाता...

Mangla Gauri Vrat 2026 : हिंदू धर्म में  जैसे सावन का महीना शिव जी की पूजा करने और उन्हें प्रसन्न करने के लिए बहुत खास माना जाता है, वैसे ही सावन का मंगलवार माता पार्वती की पूजा के लिए उत्तम माना जाता है। सावन के हर मंगलवार माता पार्वती को समर्पित मंगला गौरी व्रत रखा जाता है। यह व्रत खासतौर पर विवाहित महिलाएं और कुंवारी कन्याएं करती हैं। माना जाता है कि इस दिन सच्चे मन और पूरे विधि-विधान के साथ मंगला गौरी की पूजा करने और व्रत रखने से वैवाहिक जीवन में मधुरता बनी रहती है और कुंवारी कन्याओं को मनचाहे वर की प्राप्त होती है। इस दिन दिन पूजा के साथ मांगला गौरी के कुछ मंत्रों का जाप करने से संतान प्राप्ति में सफलता मिलती है और मन की हर मुराद पूरी होती है। तो आइए जानते हैं मंगला गौरी की पूजा करते समय कौन से मंत्रों का जाप करें। 

क्यों खास है पहला मंगला गौरी व्रत?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मंगला गौरी का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य का वरदान लाता है। यदि किसी कन्या के विवाह में अड़चनें आ रही हैं, तो उनके लिए भी यह व्रत बेहद फलदायी माना गया है। सावन का पहला व्रत पूरे महीने की ऊर्जा को तय करता है, इसलिए इस दिन की गई पूजा और मंत्र जाप का फल कई गुना बढ़कर मिलता है।

मां पार्वती के मंत्र
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सवार्थ साधिके। शरण्येत्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदा बसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि।।

ह्रीं मंगले गौरि विवाहबाधां नाशय स्वाहा।

ॐ गौरीशंकराय नमः।

ॐ नमः मनोभिलाषितं वरं देहि वरं ह्रीं ॐ गोरा पार्वती देव्यै नमः

ह्रीं गौर्य नम :

है गौरि शंकरार्धांगि यथा त्वं शंकर प्रिया।

तथा मां कुरू कल्याणि कान्तकान्तां सुदुर्लभाम्।।

ध्यान मंत्र
नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नम: ।

नमः प्रकृत्यै भद्रायै नियताः प्रणता:स्म ताम्।।

श्रीगणेशाम्बिकाभ्यां नम:, ध्यानं समर्पयामि।

श्वेते वृषे समरूढा श्वेताम्बराधरा शुचिः।

महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा।।

या देवी सर्वभू‍तेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

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