Edited By Prachi Sharma,Updated: 06 Jan, 2026 03:48 PM

Mauni Amavasya 2026 : हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व है, लेकिन माघ मास में आने वाली मौनी अमावस्या को सभी अमावस्याओं में सर्वाधिक फलदायी माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान और मौन व्रत रखने से व्यक्ति के...
शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
Mauni Amavasya 2026 : हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व है, लेकिन माघ मास में आने वाली मौनी अमावस्या को सभी अमावस्याओं में सर्वाधिक फलदायी माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान और मौन व्रत रखने से व्यक्ति के जन्म-जन्मांतर के पाप मिट जाते हैं।वर्ष 2026 में मौनी अमावस्या 18 जनवरी को मनाई जाएगी। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह दिन पितृ दोष से मुक्ति पाने और पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। आइए जानते हैं इस दिन किए जाने वाले उन खास कार्यों के बारे में, जो आपके जीवन में खुशहाली ला सकते हैं।
मौनी अमावस्या का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व
माघ मास की अमावस्या को 'मौनी अमावस्या' इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस दिन मुनि शब्द से उत्पन्न 'मौन' रहने का विधान है। मान्यता है कि इस दिन गंगा का जल अमृत के समान हो जाता है।
ज्योतिषीय दृष्टि से, इस दिन चंद्रमा और सूर्य दोनों ही मकर राशि में होते हैं। सूर्य पिता का और चंद्रमा मन का कारक है। इन दोनों का मिलन पितृ कार्यों के लिए अत्यंत शुभ फल देने वाला होता है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष है, जिसके कारण संतान प्राप्ति में बाधा, धन की कमी या घर में क्लेश रहता है, तो मौनी अमावस्या पर किए गए उपाय रामबाण सिद्ध होते हैं।
पितृ दोष से मुक्ति के लिए जरूर करें ये काम
गंगा स्नान और तर्पण
अमावस्या के दिन सूर्योदय से पूर्व किसी पवित्र नदी, विशेषकर गंगा में स्नान करें। यदि बाहर जाना संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। स्नान के बाद हाथ में काले तिल, कुशा और जल लेकर अपने पितरों का ध्यान करते हुए तर्पण करें। इससे पितरों की प्यास बुझती है और वे तृप्त होकर आशीर्वाद देते हैं।
पीपल के पेड़ की पूजा
शास्त्रों के अनुसार पीपल के वृक्ष में त्रिदेवों के साथ-साथ पितरों का भी वास होता है। मौनी अमावस्या के दिन पीपल की जड़ में जल अर्पित करें। सफेद मिठाई का भोग लगाएं। जनेऊ अर्पित करें और सात बार परिक्रमा करें।शाम के समय पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। इससे पितृ प्रसन्न होते हैं और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
मौन रहने की शक्ति
इस दिन कम से कम सवा घंटे या संभव हो तो पूरे दिन मौन व्रत रखें। मौन रहने से मानसिक शक्ति बढ़ती है और ऊर्जा का संचय होता है। यदि आप मौन नहीं रह सकते, तो कटु वचन न बोलें और केवल भगवान का नाम जपें।