Edited By Tanuja,Updated: 04 Mar, 2026 04:22 PM

ईरान-अमेरिका-इजरायल संघर्ष के बीच अमेरिका ने सुरक्षा खतरे का हवाला देते हुए कराची और लाहौर स्थित अपने वाणिज्य दूतावासों से गैर-जरूरी कर्मचारियों और उनके परिवारों को हटाने का आदेश दिया है। हालिया विरोध प्रदर्शनों और ड्रोन-मिसाइल हमलों की आशंका के बाद...
Washington: पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य टकराव का असर अब दक्षिण एशिया तक पहुंच गया है। ईरान युद्ध की आग अब कूटनीतिक रिश्तों को भी झुलसाने लगी है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के निर्देश पर कराची और लाहौर स्थित अमेरिकी दूतावास कर्मचारियों को तुरंत पाकिस्तान छोड़ने का आदेश दिया गया है। इसे वॉशिंगटन का इस्लामाबाद की सुरक्षा व्यवस्था पर घटते भरोसे और क्षेत्रीय अस्थिरता को लेकर बढ़ती चिंता के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
पाकिस्तान में अमेरिकी मिशन ने बयान जारी कर कहा कि “सुरक्षा जोखिमों के कारण लाहौर और कराची स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावासों से गैर-आपातकालीन कर्मचारी और उनके परिवार तुरंत पाकिस्तान छोड़ दें ।” हालांकि, United States Embassy Islamabad की स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हाल ही में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत के बाद 1 मार्च को पाकिस्तान में प्रदर्शनकारियों ने कराची में अमेरिकी दूतावास में तोड़फोड़ के बाद आग लगा दी। इश हिंसा में कम से कम 10 प्रदर्शनकारियों की मौत हुई थी।
अन्य देशों में भी अलर्ट
अमेरिकी विदेश विभाग ने इसी तरह के निर्देश जॉर्डन, बहरीन, इराक, कुवैत, कतर, यूएई, सऊदी अरब, ओमान और साइप्रस में भी जारी किए हैं। यह कदम ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की कथित मौत के बाद भड़के तनाव के बीच उठाया गया है, जिसके बाद कई देशों में विरोध प्रदर्शन तेज़ हो गए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय संकेत देता है कि अमेरिका संभावित क्षेत्रीय अस्थिरता को गंभीरता से ले रहा है। इससे पाकिस्तान में सुरक्षा व्यवस्था और कूटनीतिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है।