रथयात्रा में नारी शक्ति का सम्मान, पहली बार देवी सुभद्रा का रथ खींचेंगी महिलाएं

Edited By Updated: 15 Jul, 2026 11:26 AM

nari shakti in rath yatra

राजधानी दिल्ली के त्यागराज नगर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में आयोजित होने वाले 59वें रथयात्रा महोत्सव में इस वर्ष एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिलेगा। आगामी गुरुवार को भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की पारंपरिक रथयात्रा के दौरान पहली बार देवी...

नई दिल्ली (इंट): राजधानी दिल्ली के त्यागराज नगर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में आयोजित होने वाले 59वें रथयात्रा महोत्सव में इस वर्ष एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिलेगा। आगामी गुरुवार को भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की पारंपरिक रथयात्रा के दौरान पहली बार देवी सुभद्रा के रथ को केवल महिला श्रद्धालु खींचेंगी। मंदिर प्रबंधन का मानना है कि यह पहल महिला सशक्तिकरण के साथ-साथ सामाजिक समरसता और समानता के संदेश को मजबूत करेगी।

Nari Shakti in Rath Yatra

महिला सशक्तिकरण का मजबूत संदेश
मंदिर समिति का कहना है कि देवी सुभद्रा स्वयं शक्ति और सम्मान का प्रतीक हैं। ऐसे में उनके रथ को महिलाओं द्वारा खींचे जाने का निर्णय नारी सम्मान और समान भागीदारी की भावना को दर्शाता है। यह पहल धार्मिक आयोजनों में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित करती है।

धार्मिक अनुष्ठानों का रहेगा विशेष महत्व
रथयात्रा से पहले भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा को गर्भगृह से बाहर लाकर विशेष विधि-विधान के साथ रथों पर विराजमान किया जाएगा। इसके बाद पारंपरिक ‘छेरा पहरा’ अनुष्ठान संपन्न होगा, जिसे रथयात्रा की महत्वपूर्ण परंपरा माना जाता है। श्रद्धालुओं को इस दौरान भगवान के दर्शन का दुर्लभ अवसर प्राप्त होगा।

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सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे आकर्षण के केंद्र
महोत्सव के दौरान भजन-संध्या, ओडिसी नृत्य, लोक संगीत और धार्मिक प्रस्तुतियों का आयोजन किया जाएगा। बच्चों और महिलाओं के लिए विशेष सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं भी रखी गई हैं। आयोजकों का उद्देश्य धार्मिक आयोजन को सामाजिक और सांस्कृतिक उत्सव के रूप में भी स्थापित करना है।

11 दिवसीय महोत्सव की तैयारियां पूरी
रथयात्रा महोत्सव 11 दिनों तक चलेगा, जिसमें धार्मिक अनुष्ठानों के साथ विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। मंदिर परिसर में विशेष सजावट और श्रद्धालुओं के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। महोत्सव की शुरुआत पारंपरिक पूजा-अर्चना और मंगल आरती के साथ होगी, जिसके बाद रथयात्रा निकाली जाएगी।

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तीनों रथों की रहेगी विशेष पहचान
यात्रा में सबसे आगे भगवान बलभद्र का रथ चलेगा, उसके पीछे भगवान जगन्नाथ का और मध्य में देवी सुभद्रा का रथ रहेगा। विशेष बात यह होगी कि सुभद्रा रथ को खींचने की जिम्मेदारी केवल महिला श्रद्धालुओं को दी गई है। मंदिर समिति के अनुसार बड़ी संख्या में महिलाओं ने इस पहल में भाग लेने के लिए उत्साह दिखाया है।

ओडिशा के कारीगरों ने तैयार किए रथ
महोत्सव के लिए रथों का निर्माण और सजावट ओडिशा से आए अनुभवी कारीगरों द्वारा की गई है। पारंपरिक शैली में तैयार किए गए इन रथों में पुरी की प्रसिद्ध रथयात्रा की झलक दिखाई देगी। मंदिर प्रशासन का कहना है कि रथों की भव्यता और धार्मिक गरिमा बनाए रखने के लिए विशेष ध्यान दिया गया है।

रथयात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह
रथयात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। राजधानी सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में भक्तों के पहुंचने की संभावना है। प्रशासन और मंदिर समिति ने सुरक्षा, यातायात और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर व्यापक तैयारियां की हैं ताकि श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के महोत्सव का आनंद ले सकें।

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