Edited By Niyati Bhandari,Updated: 08 Jul, 2026 09:52 AM

राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एस.आई.टी.) की प्रारंभिक रिपोर्ट में कई गंभीर तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 40 दिनों की सी.सी.टी.वी. फुटेज की जांच के दौरान चढ़ावे की गिनती के समय कथित चोरी की 70 घटनाएं सामने...
अयोध्या (इंट.): राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एस.आई.टी.) की प्रारंभिक रिपोर्ट में कई गंभीर तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 40 दिनों की सी.सी.टी.वी. फुटेज की जांच के दौरान चढ़ावे की गिनती के समय कथित चोरी की 70 घटनाएं सामने आईं। फुटेज में कुछ कर्मचारी कथित तौर पर नोटों की गड्डियां जेब में डालते, जूतों और कपड़ों में छिपाते दिखाई दिए हैं। एस.आई.टी. ने चढ़ावे की निगरानी व्यवस्था, सुरक्षा प्रबंधन और पर्यवेक्षण में गंभीर खामियां होने की बात कही है।
जांच एजैंसियां अब कथित गबन से हुए नुकसान की भरपाई की दिशा में भी कार्रवाई की तैयारी कर रही हैं। सूत्रों के मुताबिक भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बी.एन.एस.एस.) की धारा 107 के तहत आरोपियों की चल-अचल संपत्तियों से रिकवरी की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि नकदी और सोना-चांदी के रूप में वास्तविक नुकसान कितना हुआ है और कथित रूप से कितनी राशि या संपत्ति का दुरुपयोग हुआ। ट्रस्ट के अनुसार, वर्ष 2020 में गठन के बाद से अब तक निधि समर्पण अभियान और अन्य दान के माध्यम से कुल 3,264 करोड़ रुपए प्राप्त हुए हैं। इनमें से 2,370 करोड़ रुपए मंदिर निर्माण और अन्य विकास कार्यों पर खर्च किए गए। वहीं 31 मार्च 2026 तक चढ़ावे के रूप में 582 करोड़ रुपए प्राप्त हुए, जिनमें से 391 करोड़ रुपए संचालन एवं व्यवस्थाओं पर व्यय किए गए, जबकि शेष राशि बैंक खातों में सुरक्षित है।
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के पास किसी प्रकार की अनियमितता का ठोस प्रमाण है तो वह सार्वजनिक आरोप लगाने की बजाय उसे एस.आई.टी. को उपलब्ध करवाए।
उन्होंने कहा कि ट्रस्ट जांच में पूरा सहयोग कर रहा है और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई का समर्थन करेगा।