Nathdwara : राम नवमी पर नाथद्वारा बना भक्ति का केंद्र, गिरिराज पर्वत पर विराजमान हुए हनुमान जी

Edited By Updated: 28 Mar, 2026 09:14 AM

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Nathdwara : राजस्थान की पावन धरती और पुष्टिमार्गीय वैष्णव परंपरा की प्रमुख पीठ नाथद्वारा ने एक बार फिर अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर मजबूत किया है। विश्व की सबसे ऊंची शिव प्रतिमा ‘विश्वास स्वरूपम’ के बाद अब नाथद्वारा में 131...

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Nathdwara : राजस्थान की पावन धरती और पुष्टिमार्गीय वैष्णव परंपरा की प्रमुख पीठ नाथद्वारा ने एक बार फिर अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर मजबूत किया है। विश्व की सबसे ऊंची शिव प्रतिमा ‘विश्वास स्वरूपम’ के बाद अब नाथद्वारा में 131 फीट ऊंची ‘श्रीजी के हनुमानजी’ की भव्य प्रतिमा स्थापित की गई है, जिसने इस शहर को अंतरराष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाई है।

राम नवमी के शुभ अवसर पर इस विशाल प्रतिमा को श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिया गया। गिरिराज पर्वत की चोटी पर स्थापित यह प्रतिमा केवल आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि आधुनिक इंजीनियरिंग और स्थापत्य कला का भी शानदार उदाहरण मानी जा रही है।

कठिन परिस्थितियों में बना अद्भुत निर्माण
करीब 500 फीट ऊंचे गिरिराज पर्वत के शिखर पर इस प्रतिमा का निर्माण करना बेहद चुनौतीपूर्ण था। वहां तक कोई पक्का मोटर मार्ग नहीं था और रास्ता भी काफी दुर्गम था, फिर भी इंजीनियरों और कारीगरों की टीम ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद इस परियोजना को सफलतापूर्वक पूरा किया।

निर्माण कार्य में एम-30 ग्रेड आरसीसी और उच्च गुणवत्ता वाले स्टील स्ट्रक्चर का उपयोग किया गया है। प्रतिमा को मजबूत बनाने के लिए लगभग 115 टन स्टील लगाया गया, जबकि बाहरी हिस्से को सुरक्षित रखने के लिए 40 टन यूवी रेजिस्टेंट फाइबर ग्लास का इस्तेमाल किया गया है, जिससे यह तेज धूप, बारिश और तेज हवाओं से सुरक्षित रहेगी। इस पूरी परियोजना को पूरा करने में करीब तीन साल का समय लगा।

विनम्रता की मुद्रा में हनुमानजी
इस प्रतिमा की सबसे बड़ी विशेषता इसकी मुद्रा है। सामान्यतः हनुमानजी की प्रतिमाएं गदा धारण किए या वीर मुद्रा में होती हैं, लेकिन यहां हनुमानजी हाथ जोड़कर विनम्र और समर्पित भाव में खड़े हैं।

सबसे खास बात यह है कि हनुमानजी का मुख सीधे श्रीनाथजी मंदिर की ओर है, जो सेवक और भगवान के अटूट संबंध को दर्शाता है। यह दृश्य भक्तों को भक्ति, सेवा और समर्पण का संदेश देता है।

कई विशेषज्ञों के सहयोग से पूरा हुआ सपना
इस विशाल परियोजना को साकार करने में महाराष्ट्र के उद्योगपति गिरीश भाई शाह की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वहीं प्रसिद्ध शिल्पकार नरेश कुमावत, स्ट्रक्चरल डिजाइनर शरद गुप्ता और उनकी टीम ने इस प्रतिमा को आकार देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। निर्माण पूरा होने के बाद इस प्रतिमा को श्रीनाथजी मंदिर मंडल को सौंप दिया गया।

पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
अब नाथद्वारा शिव और हनुमान भक्ति के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है। एक ओर विश्व की ऊंची शिव प्रतिमा और दूसरी ओर विशाल हनुमान प्रतिमा, ये दोनों मिलकर राजसमंद जिले को एक बड़े धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करेंगे। इससे स्थानीय पर्यटन बढ़ेगा और क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

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