Zomato-Swiggy डिलीवरी ठप! पेट्रोल-डीजल की मार से गुस्साए वर्कर्स ने रखी ये मांग

Edited By Updated: 15 May, 2026 07:26 PM

delivery and cab services could come to a halt for 5 hours

देश में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों का असर अब ऐप आधारित डिलीवरी और कैब सेवाओं पर भी साफ दिखाई देने लगा है। बढ़ते ईंधन खर्च के विरोध में गिग एवं प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन (GIPSWU) ने शुक्रवार को बड़ा प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। यूनियन...

नेशनल डेस्क : देश में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों का असर अब ऐप आधारित डिलीवरी और कैब सेवाओं पर भी साफ दिखाई देने लगा है। बढ़ते ईंधन खर्च के विरोध में गिग एवं प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन (GIPSWU) ने शुक्रवार को बड़ा प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। यूनियन के मुताबिक दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक गिग वर्कर्स ऐप बंद रखकर विरोध जताएंगे।

यूनियन का कहना है कि पेट्रोल-डीजल महंगा होने से सबसे ज्यादा असर डिलीवरी बॉय और कैब ड्राइवरों की कमाई पर पड़ रहा है। Swiggy, Zomato, Blinkit, Zepto, Ola, Uber और Rapido जैसी कंपनियों के लिए काम करने वाले लाखों वर्कर्स अपनी रोजी-रोटी के लिए बाइक और स्कूटर पर निर्भर हैं। ऐसे में ईंधन की बढ़ती कीमतें उनकी बचत लगातार कम कर रही हैं।

20 रुपये प्रति किलोमीटर भुगतान की मांग

यूनियन ने कंपनियों से मांग की है कि गिग वर्कर्स के लिए कम से कम 20 रुपये प्रति किलोमीटर का सर्विस रेट तय किया जाए। उनका कहना है कि पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ते ही खर्च तुरंत बढ़ जाता है, लेकिन कंपनियां डिलीवरी चार्ज या प्रति किलोमीटर भुगतान में कोई बढ़ोतरी नहीं करतीं।

GIPSWU की अध्यक्ष Seema Singh ने कहा कि भीषण गर्मी में लंबे समय तक काम करने वाले डिलीवरी वर्कर्स पहले से ही दबाव में हैं और अब ईंधन महंगा होने से उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कंपनियों ने भुगतान बढ़ाने पर फैसला नहीं लिया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

1 करोड़ से ज्यादा वर्कर्स प्रभावित

यूनियन के नेशनल कोऑर्डिनेटर Nirmal Gorana के मुताबिक देश में करीब 1 करोड़ 20 लाख गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स काम कर रहे हैं। इनमें फूड डिलीवरी, ग्रॉसरी डिलीवरी, लॉजिस्टिक्स और कैब सेवाओं से जुड़े लोग शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि बढ़ती ईंधन कीमतों का सीधा असर इन वर्कर्स की कमाई पर पड़ रहा है, क्योंकि पेट्रोल, गाड़ी की सर्विस और दूसरे खर्च उन्हें अपनी जेब से उठाने पड़ते हैं।

यूनियन ने सरकार से भी मांग की है कि ऐप आधारित कंपनियों को भुगतान बढ़ाने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि ईंधन महंगा होने का पूरा बोझ वर्कर्स पर न पड़े। यूनियन का कहना है कि शुक्रवार का प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहेगा और इसका मकसद सरकार और कंपनियों तक गिग वर्कर्स की आर्थिक परेशानियां पहुंचाना है।

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