Onam Festival: 10 दिनों तक चलने वाला ओणम हर दिन लेकर आता है एक नया संदेश

Edited By Updated: 03 Sep, 2023 10:28 AM

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भारत त्योहारों का देश है, यहां हर दिन कोई न कोई त्यौहार मनाया जाता है। दक्षिण भारत के मुख्य त्योहारों की बात करें तो उनमें से एक है ओणम का त्योहार। यह पूरे 10 दिनों तक

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Onam Festival : भारत त्योहारों का देश है, यहां हर दिन कोई न कोई त्यौहार मनाया जाता है। दक्षिण भारत के मुख्य त्योहारों की बात करें तो उनमें से एक है ओणम का त्योहार। यह पूरे 10 दिनों तक चलता है और इसकी धूम अन्य पर्वों से कुछ हटकर रहती है। महाराज बलि और वामन अवतार लेने वाले भगवान विष्णु का स्वागत करने के लिए ओणम मनाई जाती है। ओणम पर्व की आधिकारिक तिथियां मलयालम कैलेंडर पर आधारित होती है। केरल में तो इसकी छटा ही कुछ अलग होती है। ओणम पर किसान प्रकृति को अच्छी फसल देने के लिए धन्यवाद करते हैं। तो आइए जानते हैं कि ओणम से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें

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Why is the festival of Onam celebrated क्यों मनाया जाता है ओणम का त्योहार
ओणम का त्योहार मनाने के पीछे बहुत सारी मान्यताएं हैं। यह त्योहार दानवीर असुर राजा बलि के सम्मान में मनाया जाता है।  विष्णु जी ने वामन का रुप लेकर बलि के घमंड को तोड़ा था। राजा बलि की वचन बद्धता को देखकर विष्णु जी ने उन्हें पाताल लोक का राजा बना दिया। केरल के लोग यह मानते हैं कि ओणम के दिन राजा बलि पाताल लोक से धरती पर आते हैं और अपनी प्रजा का हाल-चाल लेते हैं।    

Importance of 10 days of Onam ओणम के 10 दिनों का महत्व
पहला दिन (अथम) ओणम के पहले दिन सुबह-सुबह स्नान के बाद मंदिर जाकर भगवान विष्णु की पूजा होती है। नाश्ते में केला और पापड़ मुख्य रुप से खाया जाता है। इसके बाद पुष्पकालीन और पकलम बनाने की प्रथा है।

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दूसरा दिन (चिथिरा)- दूसरे दिन महिलाएं पुरुषों द्वारा लाए गए नए फूलों को पुष्पकालीन में जोड़ने का काम करती हैं।

तीसरा दिन (विसाकम)- ओणम का तीसरा दिन खास महत्व रखता है क्योंकि 10वें दिन के उत्सव के लिए शॉपिंग आज ही के दिन की जाती है।

चौथा दिन (विसाकम)- इस रोज दक्षिण भारत के बहुत सारे स्थानों पर फूलों का कालीन बनाने की प्रतियोगिताएं होती हैं। 10वें दिन के समारोह के लिए अचार और आलू चिप्स जैसे पकवान भी बनाए जाते हैं।

पांचवां दिन (अनिजाम)- पांचवें दिन नौका दौड़ प्रतियोगिता का गठन होता है, इसे वल्लमकली कहां जाता है।

छठा दिन (थिक्रेता)- ओणम के छठे दिन बहुत तरह के विशेष समारोह का प्रबंध किया जाता है। दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ इस पर्व की धूम चारों तरफ मची होती है।

सातवां दिन (मूलम)- ओणम का ये दिन बेहद खास होता है। बाजारों की रौनक इस दिन को और भी खुशनुमा बना देती है। तरह-तरह की मिठाइयों और व्यंजनों के साथ लोग इस त्यौहार का लुत्फ उठाते हैं।

आठवां दिन (पूरादम)- ओणम के आठवें दिन लोग मिट्टी के साथ पीरामिड के बनावट की तरह मूर्तियों की रचना करते हैं और इन मूर्तियों को मां कहकर बुलाते हैं।

नौवां दिन (उथिरादम)- वैसे तो ये नौवां दिन होता है लेकिन इसे प्रथम ओणम कहते हैं। यह दिन इसलिए खास होता है क्योंकि लोग राजा महाबलि के आने का इंतजार करते हैं।

दसवां दिन (थिरुवोणम)- ये ओणम का दसवां और आखिरी दिन होता है। ये दिन अन्य दिनों के मुकाबले सबसे ज्यादा खास होता है क्योंकि इस दिन राजा बलि धरती पर आते हैं। राजा बलि के भक्त उनके स्वागत के लिए चावल के आटे से बने घोल से मुख्य द्वार को सजाते हैं। इस दिन को दूसरा ओणम के नाम से भी जाना जाता है।

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