वास्तु गुरु कुलदीप सलूजा: क्या माता-पिता को मंदिर में स्थान देना गलत है? जानें एक तार्किक दृष्टिकोण

Edited By Updated: 19 Aug, 2026 07:04 AM

photographs of ancestors

Photographs of ancestors: क्या आप घर में दिवंगत बुजुर्गों की फोटो लगाने के सही स्थान को लेकर परेशान हैं? जानें वास्तु शास्त्र और तार्किक दृष्टिकोण के अनुसार पितरों की तस्वीर लगाने की सही दिशा, नियम और सावधानियां।

Pictures of forefathers: भारतीय संस्कृति में दिवंगत बुजुर्गों या पितरों के प्रति सम्मान और श्रद्धा का भाव सर्वोपरि है। उनका आशीर्वाद प्राप्त करने और उनकी स्मृतियों को संजोने के लिए हम अपने घरों में उनकी तस्वीर लगाते हैं। हालांकि, इन तस्वीरों के स्थान को लेकर वास्तु संबंधी कई धारणाएं प्रचलित हैं, लेकिन कई बार ये नियम व्यावहारिक जीवन में कठिन प्रतीत होते हैं।

Pictures of forefathers

यहां पितरों की तस्वीर लगाने के संबंध में व्यावहारिक और तार्किक दृष्टिकोण प्रस्तुत है-
वास्तु शास्त्र में अक्सर पितरों की तस्वीरों को दक्षिण दिशा की दीवार पर लगाने का परामर्श दिया जाता है, ताकि घर में शांति बनी रहे। हालांकि, अनुभव यह बताता है कि यह नियम अनिवार्य न होकर केवल एक दिशा-निर्देश है।

किसी भी स्थान का चयन- किचन (रसोई) को छोड़कर, आप घर के किसी भी कमरे और किसी भी दिशा में दिवंगत बुजुर्गों की तस्वीर लगा सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि तस्वीर उस स्थान पर हो जहां आप उन्हें सहजता से नमन कर सकें।

Pictures of forefathers

मंदिर में स्थान- कई बार यह कहा जाता है कि पितरों की फोटो मुख्य मंदिर में नहीं लगानी चाहिए। लेकिन, यदि हम अपने माता-पिता को ही साक्षात ईश्वर का रूप मानते हैं, तो उन्हें मंदिर में स्थान देने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए। माता-पिता का स्वरूप सदैव कल्याणकारी और आशीर्वाद देने वाला ही होता है।

शयन कक्ष (बेडरूम)- बेडरूम में तस्वीर लगाने के संबंध में एक व्यावहारिक शर्त यह है कि यदि आप वहां तस्वीर के सामने पूजा, दीपक या अगरबत्ती नहीं जलाते हैं, तो बेडरूम में तस्वीर लगाने से कोई वास्तुदोष नहीं आता।

किचन (रसोई घर)- रसोई में पितरों की तस्वीर नहीं लगाना सही नहीं रहता है।

प्रसन्नचित्त मुद्राः पितरों की ऐसी तस्वीर का चयन करें जिसमें उनका चेहरा सौम्य और प्रसन्न हो। उन्हें देखकर हमारे मन में कृतज्ञता और सकारात्मकता का भाव उत्पन्न होना चाहिए।

पितरों की तस्वीर का फ्रेम अलग होना चाहिए। इसे जीवित व्यक्तियों की तस्वीरों के साथ मिलाने के बजाय अलग रखना ही उचित है, ताकि उनके प्रति श्रद्धा और सम्मान स्पष्ट रहे।

दिवंगत बुजुर्ग हमारे संस्कारों के आधार हैं। उनकी तस्वीर घर में लगाना उनके प्रति हमारे अगाध प्रेम और सम्मान का प्रतीक है। शास्त्रों के नियमों का पालन अपनी जगह है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण हमारा ‘भाव’ है। यदि हमारे मन में उनके प्रति सम्मान है और उन्हें देखकर हमें सकारात्मक ऊर्जा और आशीर्वाद का अनुभव होता है, तो घर का कोई भी उचित स्थान उनके लिए उपयुक्त है। अंततः, वे हमारे लिए कल्याणकारी ही हैं और उनकी उपस्थिति घर में संस्कार और अनुशासन बनाए रखती है।

Pictures of forefathers

वास्तु गुरु कुलदीप सलूजा
thenebula2001@gmail.com

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