Edited By Niyati Bhandari,Updated: 26 Aug, 2026 10:22 AM

अंतर्राष्ट्रीय आद्या श्री विद्या ज्योतिष भूगोल एवं प्राच्य विद्या वास्तु पर्यावरण शोध संस्थान कंडाघाट के संस्थापक अध्यक्ष पं. राजीव शर्मा ‘शूर’ ने बताया कि इस वर्ष राखी को लेकर जनता भ्रमित हो रही है।
कंडाघाट (विशेष): अंतर्राष्ट्रीय आद्या श्री विद्या ज्योतिष भूगोल एवं प्राच्य विद्या वास्तु पर्यावरण शोध संस्थान कंडाघाट के संस्थापक अध्यक्ष पं. राजीव शर्मा ‘शूर’ ने बताया कि इस वर्ष राखी को लेकर जनता भ्रमित हो रही है।
उन्होंने कहा कि ‘राखी’ पर्व हमेशा श्रावण पूर्णिमा पर ही मनाएं और बहनें अपने भाइयों की शुभता के लिए केवल पूर्णिमा के दौरान ही राखी बांधें। लेकिन प्रथम राखी अपने गुरु, कुल देवता, प्रथम पूज्य गणेश जी, भगवान श्री कृष्ण और हनुमान जी को बांधें। फिर घर में भाइयों को बांधें।
उन्होंने बताया कि 27 अगस्त को प्रात: 9 बजकर 09 मिनट पर कन्या लग्न में राखी पर्व आरंभ होगा। पूर्णिमा की उसी समय शुरूआत होगी, शनि की लग्न पर क्रूर (वक्री) दृष्टि और सूर्य-बुध की केतू-राहू का ग्रहण योग लगा है जबकि तृतीय भाव भाई का है उसका मंगल उससे अष्टम में मिथुन राशि में है तो चंद्र दोष पंचक भाव का चंद्रमा को चंद्र ग्रहण में पंचक में घटित होगा जोकि 27 अगस्त की दोपहर 1 बजकर 36 मिनट से घनिष्ठा नक्षत्र में होगा वहीं भद्रा प्रात: से लगी है जोकि अशुभ नहीं होगी।
अत: 28 अगस्त को प्रात: 9 बजकर 49 मिनट पर पूर्णिमा समाप्त होते ही राखी पर्व भी समाप्त होगा। इसके बाद 28 अगस्त 9 बजकर 49 मिनट प्रात: के बाद भाद्रपद की प्रतिपदा की शुरूआत से राखी बांधना भाई-बहन दोनों के हानि करेगा। वैसे भी शास्त्रों में पूर्णिमा के बाद राखी बांधना वर्जित है।