Edited By Sarita Thapa,Updated: 06 Oct, 2026 11:01 AM

पितृ पक्ष का समापन सर्वपितृ अमावस्या के दिन होता है। इस दिन उन सभी पितरों के लिए श्राद्ध, तर्पण और दान किया जाता है, जिनकी तिथि याद न हो या किसी कारण उनका श्राद्ध न किया जा सका हो।
Sarvapitru Amavasya : पितृ पक्ष का समापन सर्वपितृ अमावस्या के दिन होता है। इस दिन उन सभी पितरों के लिए श्राद्ध, तर्पण और दान किया जाता है, जिनकी तिथि याद न हो या किसी कारण उनका श्राद्ध न किया जा सका हो। माना जाता है कि पितरों को याद करके श्राद्ध से किए गए कर्मों से उन्हें शांति मिलती और पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी दिन दीपदान करने की भी परंपरा है। मान्यता है कि दीपक का प्रकाश पितरों के प्रति सम्मान और श्रद्धा का प्रतीक है। तो आइए जानते हैं सर्वपितृ अमावस्या पर कौन से 4 दीपदान किए जा सकते हैं।
घर के मुख्य द्वार पर दीपदान
सर्वपितृ अमावस्या की शाम घर के मुख्य द्वार के पास एक दीपक जलाने की परंपरा कई जगहों पर है। इसके लिए मिट्टी का दीपक लेकर उसमें सरसों या तिल का तेल डाल सकते हैं। मान्यता है कि इससे घर का वातावरण सकारात्मक रहता है और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। दीपक जलाते समय अपने पूर्वजों को याद करें और उनके प्रति मन में श्रद्धा रखें। दीपक ऐसी जगह रखें जहां वह सुरक्षित रहे और बुझने की संभावना कम हो।
दक्षिण दिशा में दीपक जलाएं
धार्मिक परंपराओं में दक्षिण दिशा को पितरों से संबंधित माना गया है। इसलिए सर्वपितृ अमावस्या की शाम दक्षिण दिशा की ओर दीपक जलाने का विशेष महत्व बताया जाता है। आप घर के बाहर या सुरक्षित स्थान पर तिल के तेल का दीपक रख सकते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से पितरों का स्मरण होता है और उनकी कृपा प्राप्त होती है।

पीपल के पेड़ के नीचे दीपदान
हिंदू धर्म में पीपल के वृक्ष को पूजनीय माना गया है। अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने की परंपरा भी कई स्थानों पर प्रचलित है। शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे तिल के तेल का दीपक जलाकर पूर्वजों का स्मरण किया जा सकता है। इसके साथ ही मन ही मन पितरों की शांति और परिवार के सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
जल के पास दीपदान
सर्वपितृ अमावस्या पर नदी, तालाब या किसी पवित्र जल स्थान के किनारे दीपदान करने की भी धार्मिक परंपरा है। यदि बाहर जाकर दीपदान करना संभव न हो तो घर में पूजा स्थल पर जल से भरा पात्र रखकर उसके पास दीपक जलाया जा सकता है।दीपदान करते समय पितरों का ध्यान करें और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें। श्रद्धा से किया गया यह छोटा-सा कर्म भी पितृ पक्ष की भावनाओं से जुड़ा माना जाता है।

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ