Sarvapitru Amavasya 2026 : सर्वपितृ अमावस्या 2026 कब है, जानिए पितरों की विदाई का सही समय और विधि

Edited By Updated: 04 Oct, 2026 11:09 AM

sarvapitru amavasya 2026

पितृ पक्ष के अंतिम दिन यानी सर्वपितृ अमावस्या का इंतजार अब खत्म होने वाला है। हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पर सर्वपितृ अमावस्या मनाई जाती है और इस दिन को पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और दान-पुण्य करने के लिए बहुत ही...

Sarvapitru Amavasya 2026 : पितृ पक्ष के अंतिम दिन यानी सर्वपितृ अमावस्या का इंतजार अब खत्म होने वाला है। हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पर सर्वपितृ अमावस्या मनाई जाती है और इस दिन को पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और दान-पुण्य करने के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष के आरंभ पर पितर धरती पर आते हैं और सर्वपितृ अमावस्या के दिन अपने लोक चले जाते हैं। कुछ स्थानों पर इस अमावस्या को पितृ विसर्जन अमावस्या और महालय अमावस्या भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस तिथि की खास बात यह भी मानी जाती है की जिन लोगों को अपने किसी पितर की श्राद्ध की तिथि याद नहीं है या फिर किसी कारणवश उस तिथि पर श्राद्ध नहीं हो पाया हो उनके लिए सर्वपितृ अमावस्या का दिन विशेष माना जाता है। कहा जाता है कि अगर कोई पितरों की विदाई नहीं करता है तो श्राद्ध कर्म का फल और पितरों को मोक्ष नहीं मिलता है। ऐसे में इस दिन श्राद्ध कर्म को लेकर किसी भी तरह की गलती न हो, इसके लिए सही तिथि और शुभ समय की जानकारी होना बेहद जरूरी है। तो आइए जानते हैं सर्वपितृ अमावस्या कब है, आश्विन कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि कब से कब तक रहेगी और पितरों का श्राद्ध किस समय करना शुभ माना जाएगा।

Sarvapitru Amavasya 2026

सर्वपितृ अमावस्या 2026 मुहूर्त 
हिंदू पंचांग के अनुसार अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि का आरंभ 9 अक्टूबर दिन शुक्रवार को रात 9 बजकर 35 मिनट पर होगा और इसका समापन 10 अक्टूबर दिन शनिवार को रात 9 बजकर 19 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार देखा जाएं तो सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर दिन शनिवार को मनाई जाएगी और इस दिन ही अमावस्या श्राद्ध किया जाएगा। आगे बात करें कुतुप मूहूर्त की तो इसका समय सुबह 11 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। जिसकी कुल अवधि 46 मिनट कर रहेगी। बात करें रौहिण मुहूर्त की तो इसका समय दोपहर 12 बजकर 33 मिनट से दोपहर 1 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। जिसकी कुल अवधि भी 46 मिनट रहेगी। तो वहीं अपराह्न काल का समय दोपहर 1 बजकर 19 मिनट से दोपहर 3 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। इसकी कुल अवधि 2 घंटे और 19 मिनट तक रहेगी।

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सर्वपितृ अमावस्या के दिन पितरों को सम्मानपूर्वक विदाई देने की विधि

सर्वपितृ अमावस्या की संध्या में सबसे पहले चार मिट्टी के दीपक लें और उनमें सरसों का तेल भरकर रुई की बत्ती लगाएं। इन दीपकों को श्रद्धापूर्वक प्रज्वलित करें। इसके बाद एक पात्र में स्वच्छ जल लेकर अपने पितरों का स्मरण करें और मन ही मन उनसे विनम्र प्रार्थना करें कि पितृपक्ष का समय अब पूर्ण हो चुका है। आप सभी पितरों से निवेदन करें कि वे परिवार के प्रत्येक सदस्य पर अपनी कृपा और आशीर्वाद बनाए रखें और अब अपने लोक की ओर प्रस्थान करें। इस दौरान पितरों से परिवार की सुख-शांति, उत्तम स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करें। साथ ही यह प्रार्थना भी करें कि आने वाले समय में घर-परिवार में शुभ और मांगलिक कार्यों का वातावरण बने। यदि पितृपक्ष के दौरान पूजा, तर्पण या किसी अन्य कर्म में जाने-अनजाने कोई त्रुटि हुई हो, तो उसके लिए भी श्रद्धापूर्वक क्षमा मांग लें। इसके बाद जल से भरा लोटा और जलता हुआ दीपक साथ लेकर मंदिर की ओर जाएं। वहां पहुंचकर दीपक को भगवान विष्णु के समक्ष श्रद्धा से स्थापित करें। इसके पश्चात पीपल के वृक्ष पर जल अर्पित करें और हाथ जोड़कर अपने पितरों का स्मरण करते हुए उनसे विदाई की प्रार्थना करें। मन में भाव रखें कि पितृपक्ष की अवधि अब समाप्त हो रही है, इसलिए हे पितृदेव, आप हमें अपना आशीर्वाद प्रदान करें और अपने लोक में वापस पधारें। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस पूरी प्रक्रिया को श्रद्धा, शांति और एकाग्र भाव से करना चाहिए। इस दौरान मौन रहना और किसी से बातचीत न करना भी इस विधि का हिस्सा माना जाता है।

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