Edited By Sarita Thapa,Updated: 26 Aug, 2026 01:26 PM

सनातन धर्म में सावन पूर्णिमा का धार्मिक और अध्यात्मिक महत्व माना जाता है। सावन माह का समापन पूर्णिमा के दिन होता है। इस दिन माता पार्वती, भगवान शिव और श्रीहरि की पूजा करने का विधान है।
Sawan Purnima Niyam : सनातन धर्म में सावन पूर्णिमा का धार्मिक और अध्यात्मिक महत्व माना जाता है। सावन माह का समापन पूर्णिमा के दिन होता है। इस दिन माता पार्वती, भगवान शिव और श्रीहरि की पूजा करने का विधान है। माना जाता है कि इस दिन स्नान, व्रत, पूजा-पाठ और जरूरतमंदों को दान करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है और भगवान शिव की कृपा बनी रहती है। शास्त्रों के अनुसार, सावन पूर्णिमा पर की गई पूजा और दान से घर में सुख-समृद्धि आती है, लवेकिन कुछ ऐसी गलतियां हैं, जिन्हें करने से इस दिन बचना चाहिए। नहीं तो पूजा का शुभ फल प्रभावित हो सकता है। तो आइए जानते हैं वो कौन सी गलतियां हैं, जो सावन पूर्णिमा के दिन नहीं करनी चाहिए।
सावन पूर्णिमा पर इन बातों का रखें विशेष ध्यान
तामसिक आहार से दूरी
सावन पूर्णिमा के दिन तामसिक भोजन जैसे- मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज का सोवन नहीं करना चाहिए। इस दिन सात्विक भोजन का ही सेवन करें।
शिव पूजा में वर्जित सामग्रियां
सावन पूर्णिमा के दिन भगवान शिव की पूजा करते समय शिवलिंग पर तुलसी के पत्ते, हल्दी, सिंदूर या केतकी का फूल न चढ़ाएं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस शिवलिंग पर यह सारी सामग्रियां चढ़ाना अनुचित माना जाता है।

देर तक सोने से बचें
सावन पूर्णिमा के दिन सुबह देर तक नहीं सोना चाहिए। सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान ध्यान करें और भगवान की आराधना में मन लगाएं।
शारीरिक कटाई-छंटाई न करें
सावन पूर्णिमा के दिन या किसी भी पवित्र तिथि पर बाल कटवाना, शेविंग करना या नाखून काटना वर्जित माना जाता है।
कलात्मकता व विवाद से दूरी
सावन पूर्णिमा के दिन घर में झगड़ा, क्लेश या किसी के प्रति अपशब्दों का प्रयोग न करें। द्वार पर आए किसी भी गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति को खाली हाथ न लौटाएं।
गहरे या काले कपड़ों से परहेज
सावन पूर्णिमा के दिन पूजा-पाठ के दौरान काले वस्त्र पहनने से बचें, क्योंकि काले रंग को शुभ धार्मिक कार्यों में नकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है।
