Shani Dev Birth Story: 16 मई को न्याय के अधिष्ठाता शनि देव का जन्मोत्सव, शनिवार और अमावस्या का दुर्लभ संयोग, पढ़ें अनसुनी कथाएं

Edited By Updated: 09 May, 2026 09:22 AM

shani dev birth story

Shani Dev Birth Story: 16 मई 2026 को शनि जयंती मनाई जाएगी। जानिए माता छाया और सूर्य देव से जुड़ी जन्म कथा, भगवान शिव का आशीर्वाद और शनि देव के न्याय करने का रहस्य।

Shani Dev Birth Story: हिंदू धर्म में 'न्याय के देवता' कहे जाने वाले शनि देव की जयंती इस वर्ष 16 मई 2026 को अत्यंत श्रद्धा के साथ मनाई जाएगी। इस बार का जन्मोत्सव विशेष है क्योंकि यह शनिवार के दिन पड़ रहा है, जो स्वयं शनि देव को समर्पित है। ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को होने वाला यह उत्सव भक्तों के लिए कर्मों के शोधन और न्याय के देवता की कृपा पाने का महापर्व है। आइए पढ़ें, शनि देव के जीवन से जुड़ी अनसुनी कथाएं-

PunjabKesari Shani Dev Birth Story

माता छाया की तपस्या और शनि देव का प्राकट्य
जब शनिदेव माता छाया के गर्भ में थे तो छाया ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की। भूख-प्यास, धूप-गर्मी सहने के कारण उसका प्रभाव छाया के गर्भ में पल रहे बच्चे पर भी पड़ा, जब शनिदेव का जन्म हुआ तो उनका रंग काला था। यह देख कर सूर्य देव को लगा कि यह तो मेरा पुत्र नहीं हो सकता। उन्होंने छाया पर संदेह प्रकट कर उसको अपमानित किया। मां की तप की शक्ति शनिदेव में आ गई थी, उन्होंने क्रोधित होकर अपने पिता को देखा तो सूर्य शनि की शक्ति से काले पड़ गए और उनको कुष्ठ रोग हो गया।

तब घबरा कर सूर्य देव भगवान शिव की शरण में पहुंचे। भगवान शिव ने सूर्य देव को उनकी गलती का एहसास कराया। उन्हें अपनी करनी पर दुख हुआ तथा उन्होंने क्षमा मांगी, तब उनका असली रूप उन्हें वापस मिला लेकिन इस घटना से पिता-पुत्र के संबंध हमेशा के लिए खराब हो गए।

PunjabKesari Shani Dev Birth Story

भगवान शिव पर शनिदेव की वक्र दृष्टि
एक पौराणिक कथा के अनुसार एक बार शनिदेव भगवान शिव जी के पास कैलाश पहुंचे। शिव जी को प्रणाम करके उन्हें ज्ञात करवाया कि प्रभु कल से मैं आपकी राशि में आने वाला हूं और मेरी वक्र दृष्टि आप पर पड़ने वाली है। शनिदेव की बात सुनकर भगवान आवाक रह गये और मंद-मंद मुस्काकर कहा- हे शनिदेव! आपकी वक्र दृष्टि कितने समय तक मुझ पर रहेगी। तब शनिदेव ने कहा कि हे प्रभु कल सवा प्रहर के लिये ही आप पर मेरी वक्र दृष्टि रहेगी। यह सुनकर भगवान भोलेनाथ शनिदेव की वक्र दृष्टि से बचने का उपाय सोचने लग गये और अगले ही दिन वे धरती लोक पर पधारे और एक हाथी का रूप धारण कर लिया ताकि शनिदेव की वक्र दृष्टि से बचा जा सके।

भगवान शंकर को हाथी के रूप में सवा प्रहर तक का समय व्यतीत होने पर शिव जी ने सोचा अब सारा दिन व्यतीत हो चुका है और शनिदेव की वक्र दृष्टि का उन पर कोई भी प्रभाव नहीं हो पाया। तब भगवान शिव पुनः कैलाश वापिस लौट गये। भगवान शंकर अति प्रसन्न मुद्रा में कैलाश पहुंचे तो उन्होंने वहां पर शनिदेव को उनका इंतजार करते हुए पाया व शंकर जी को देखकर शनिदेव को प्रणाम किया।

शंकर जी ने कहा हे शनिदेव - आपकी वक्र दृष्टि का मुझ पर कोई भी नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा। यह सुनकर शनि देव मुस्कुराये और कहा कि मेरी वक्र दृष्टि से कोई भी नहीं बच सकता चाहे कोई भी क्यों न हो ?

तब शनिदेव ने कहा, "हे प्रभु! मेरी ही दृष्टि के प्रभाव से आपको सवा प्रहर के लिये देव योनि को त्यागकर पशु योनी में जाना पड़ा, यही मेरी वक्र दृष्टि का आप पर प्रभाव था।"

शनिदेव की न्यायप्रियता को देखकर भगवान शिव जी अति प्रसन्न हुए व शनिदेव को सूर्य से भी ज्यादा प्रतापी होने का वरदान दे दिया।

PunjabKesari Shani Dev Birth Story

शनि दृष्टि से गणेश जी का मस्तक धड़ से अलग हो गया
ब्रह्मवैवर्तपुराण की मानें तो देवी पार्वती ने पुत्र प्राप्ति की इच्छा से ‘पुण्यक’ नामक ’ व्रत किया था। जिसके प्रभाव स्वरूप उन्हें गणेश जी पुत्र के रूप में प्रकट हुए थे। जिसके बाद पूरा देवलोक भगवान शिव और माता पार्वती को बधाई देने और बालक को आशीर्वाद देने शिवलोक पहुंच गया। मगर, शनिदेव ने न तो बालक गणेश को देखा और न ही उनके पास गए। जिस पर देवी पार्वती ने इस पर शनिदेव को टोका। जिसके बाद शनिदेव ने अपने श्राप की बात मां पार्वती को बताई।

तब देवी पार्वती ने शनैश्चर से कहा- 'तुम मेरी और मेरे बालक की ओर देखो।’

शनिदेव ने धर्म को साक्षी मानकर बालक को तो देखने का विचार किया पर बालक की माता को नहीं। उन्होंने अपने बाएं नेत्र के कोने से शिशु के मुख की ओर निहारा। शनि की दृष्टि पड़ते ही शिशु का मस्तक धड़ से अलग हो गया। माता पार्वती अपने बालक की यह दशा देख मूर्छित हो गईं। जिसके बाद देवी पार्वती को इस आघात से बाहर निकालने के लिए श्री हरि अपने वाहन गरुड़ पर सवार होकर बालक के लिए सिर की खोज में निकल पड़े और आख़िर में अपने सुदर्शन चक्र से एक हाथी का सिर काट कर कैलाश पहुंचे। देवी पार्वती के पास जाकर भगवान विष्णु ने हाथी के मस्तक को बालक गणेश के धड़ से जोड़ दिया।

PunjabKesari Shani Dev Birth Story

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
 

 

Related Story

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!