Edited By Sarita Thapa,Updated: 09 May, 2026 03:28 PM

गुरुदेव रबींद्रनाथ टैगोर का एक शिष्य उनके पास आया। वह परेशान दिख रहा था। गुरुदेव ने शिष्य से आने का कारण पूछते हुए कहा, ‘बहुत परेशान लग रहे हो। उसने कहा, हां गुरुदेव मैं बहुत दुखी हूं। रात भर मुझे नींद नहीं आई।
Rabindranath Tagore Story : गुरुदेव रबींद्रनाथ टैगोर का एक शिष्य उनके पास आया। वह परेशान दिख रहा था। गुरुदेव ने शिष्य से आने का कारण पूछते हुए कहा, ‘बहुत परेशान लग रहे हो। उसने कहा, हां गुरुदेव मैं बहुत दुखी हूं। रात भर मुझे नींद नहीं आई। मन में चिंतन चलता रहा। गुरुदेव ने कहा कि अपनी चिंता का कारण बताओ।
शिष्य ने कहा, ‘गुरुदेव, मेरे अंदर यह चिंतन चलता रहा कि जब एक दिन संसार की सभी आत्माओं को जन्म-मरण से छुटकारा मिल जाएगा तो फिर क्या होगा? प्रश्न सुनकर गुरुदेव बोले, ‘पुत्र, तुम्हारा प्रश्न भविष्य से संबंध रखता है। भविष्य बड़ा रहस्यपूर्ण है। यह संसार बड़ा विशाल है। परिवर्तन ही संसार का नियम है। एक दिन ऐसा आएगा-इस संभावना में भ्रम है, अज्ञान है, जबकि संतोष ही हमारे मन का बल है। हम वर्तमान में संतोष प्राप्त करें। बाकी सब कुछ तो रहस्य है।
इसलिए भविष्य की चिंता छोड़ दो। मनुष्य की असली चुनौती भविष्य को भेदकर उसके गर्भ में पलते रहस्य तक पहुंचना नहीं, बल्कि वर्तमान में जीने की कला सीखना है। जीवन का उद्देश्य समझने और उसे साधने की कुंजी इसी वर्तमान में छिपी है, भविष्य में नहीं। शिष्य को उसके संदेह का समाधान मिल गया था। अब वह समझ गया था कि भविष्य की चिंता करते हुए वर्तमान को बिगाड़ लेना बुद्धिमानी नहीं है। वह संतुष्ट होकर गुरुदेव के पास से लौटा।

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