Edited By Sarita Thapa,Updated: 07 May, 2026 04:08 PM

अनेक बार कुछ जिज्ञासु महात्मा बुद्ध का प्रवचन सुनने के बाद उनसे व्यक्तिगत रूप से भी मिलने आया करते थे। महात्मा बुद्ध उनकी समस्या का समाधान करते थे। एक व्यक्ति महात्मा बुद्ध के पास आकर बोला, ‘‘मैं लगभग एक महीने से आपके प्रवचन सुन रहा हूं।
Mahatma Buddha Story : अनेक बार कुछ जिज्ञासु महात्मा बुद्ध का प्रवचन सुनने के बाद उनसे व्यक्तिगत रूप से भी मिलने आया करते थे। महात्मा बुद्ध उनकी समस्या का समाधान करते थे। एक व्यक्ति महात्मा बुद्ध के पास आकर बोला, ‘‘मैं लगभग एक महीने से आपके प्रवचन सुन रहा हूं। पर मेरे ऊपर उनका कोई असर नहीं हो रहा है। ऐसा क्यों हो रहा है?’’
महात्मा बुद्ध ने पूछा, ‘‘यह बताओ, तुम कहां के रहने वाले हो?’’ उस व्यक्ति ने कहा ‘‘श्रावस्ती।’’
महात्मा बुद्ध ने पूछा, ‘‘श्रावस्ती यहां से कितनी दूर है?’’ उसने दूरी बताई। महात्मा बुद्ध ने पूछा, ‘‘तुम वहां कैसे जाते हो?’’
व्यक्ति ने कहा, ‘‘कभी घोड़े पर तो कभी बैलगाड़ी में बैठकर जाता हूं।’’
महात्मा बुद्ध ने फिर प्रश्र किया, ‘‘कितना समय लगता है?’’

उसने हिसाब लगाकर समय बताया। महात्मा बुद्ध ने कहा, ‘‘यह बताओ क्या तुम यहां बैठे-बैठे श्रावस्ती पहुंच सकते हो?’’
व्यक्ति ने आश्चर्य से कहा, ‘‘यहां बैठे-बैठे भला वहां कैसे पहुंचा जा सकता है। वहां पहुंचने के लिए कोई वाहन तो चाहिए ही।’’
महात्मा बुद्ध बोले, ‘‘यानी लक्ष्य तक पहुंचने के लिए वहां पहुंचने का प्रयत्न करना आवश्यक है। इसी तरह अच्छी बातों और ज्ञान का प्रभाव भी तभी पड़ता है जब उन्हें जीवन में उतारा जाए। उसके अनुसार आचरण किया जाए। मात्र प्रवचन सुनने या अध्ययन करने से कुछ भी प्राप्त नहीं होता।’’ उस व्यक्ति ने कहा कि भगवन अब मैं आपकी बात पूरी तरह समझ गया। अब मैं आपके उपदेश को जीवन में उतारने का प्रयास करूंगा।

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