Edited By Sarita Thapa,Updated: 03 May, 2026 02:29 PM

स्वामी रामतीर्थ उन दिनों अमरीका में भ्रमण कर रहे थे। इस दौरान उनसे मिलने एक महिला आई। वह चली तो गई थी , पर दुख के चलते वह कुछ बोल पाने में असमर्थ थी। इन क्षणों में रामतीर्थ भी उससे कुछ बोले नहीं, बस करुणापूर्ण नेत्रों से उसकी ओर देखते रहे।
Swami Rama Tirtha Story : स्वामी रामतीर्थ उन दिनों अमरीका में भ्रमण कर रहे थे। इस दौरान उनसे मिलने एक महिला आई। वह चली तो गई थी , पर दुख के चलते वह कुछ बोल पाने में असमर्थ थी। इन क्षणों में रामतीर्थ भी उससे कुछ बोले नहीं, बस करुणापूर्ण नेत्रों से उसकी ओर देखते रहे। उनकी यह करुणापूर्ण दृष्टि उस महिला को छू गई। उसका जमा हुआ दुख पिघल उठा और आंखों से आंसू बह निकले। कुछ देर तक वह रोती रही।
स्वामी रामतीर्थ उसे स्नेह भाव से निहारे जा रहे थे। भरे गले से उसने अपनी दुख भरी कहानी सुनाई, जिसका सार था कि वह प्रेम में छली गई थी। उसकी बातें सुनने के बाद रामतीर्थ बोले, बहन, यहां हर कोई अपनी क्षमता के अनुसार ही बर्ताव करता है। जिसके पास जितनी शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक जरूरत है, वह उसी के अनुसार व्यवहार करने के लिए विवश है। जिनकी भावनाएं स्वार्थ एवं कुटिलता से भरी हैं, वे तो बस क्षमा के पात्र हैं।

महिला का अगला प्रश्न था, तब क्या जीवन में सच्चा प्रेम पाना असंभव है? नहीं, ऐसा नहीं है। स्वामी रामतीर्थ ने कहा, “सच्चा प्रेम मिलता है, पर उन्हें जो सच्चा प्रेम करना जानते हैं। महिला ने कहा, “मेरा प्रेम भी तो सच्चा था। रामतीर्थ बोले- नहीं बहन, तुम्हारे प्रेम में स्वार्थ की झलक दिख रही थी। सच्चा प्रेम तो सेवा, करुणा एवं श्रद्धा के रूप में ही प्रकट होता है। रामतीर्थ की बातों का अर्थ उस की समझ में आ गया। वह समझ गई कि प्रेम में शर्तें नहीं होतीं। इसके बाद वह एक अस्पताल में नर्स बन गई।

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