Edited By Sarita Thapa,Updated: 06 Oct, 2026 11:31 AM

सनातन धर्म में शरद पूर्णिमा को बहुत खास माना जाता है। आश्विन माह की पूर्णिम तिथि पर आने वाली इस रात को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। साल 2026 में शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर को मनाई जाएगी।
Sharad Purnima Kheer Significance : सनातन धर्म में शरद पूर्णिमा को बहुत खास माना जाता है। आश्विन माह की पूर्णिम तिथि पर आने वाली इस रात को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। साल 2026 में शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इस दिन चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ दिखा देता है और उसकी चांदनी को खास रूप से शुभ और फलदायी माना जाता है। इसी वजह से शरद पूर्णिमा की रात घरों में खीर बनाकर उसे कुछ समय के लिए खुले आसमान के नीचे चांदनी में रखने की परंपरा है। लेकिन क्.या आप जनाते हैं कि आखिर शदर पूर्णिमा की रात को ही चंद्रमा की रोशनी के नीचे खीर रखने की परंपरा क्यों शुरू हुई। तो आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से।
शरद पूर्णिमा पर खीर रखने की परंपरा
धार्मिक मान्यता के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा से निकलने वाली किरणों में विशेष सकारात्मक ऊर्जा होती है। माना जाता है कि इस रात चंद्रमा की रोशनी में रखी खीर में भी उस ऊर्जा का प्रभाव आता है। इसी विश्वास के चलते श्रद्धालु रात में खीर बनाकर उसे साफ बर्तन में रखते हैं और खुले स्थान पर चांदनी के नीचे रख देते हैं। कई घरों में खीर को ढककर रखा जाता है, ताकि उसमें धूल या अन्य अशुद्धियां न जाएं। सुबह इसे भगवान को भोग लगाने के बाद परिवार के सदस्यों में प्रसाद के रूप में बांटने की परंपरा है।

पौराणिक मान्यता क्या कहती है?
शरद पूर्णिमा को भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला से भी जोड़ा जाता है। धार्मिक कथाओं में वर्णन मिलता है कि इसी पूर्णिमा की चांदनी रात में भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन में गोपियों के साथ महारास किया था। इसलिए वैष्णव परंपरा में इस रात का विशेष महत्व बताया गया है। एक अन्य मान्यता के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और देखती हैं कि कौन जागकर उनकी आराधना कर रहा है। इसी कारण इस दिन रात में जागरण और लक्ष्मी पूजन करने की परंपरा भी कई स्थानों पर देखने को मिलती है।

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