Edited By Sarita Thapa,Updated: 07 Jun, 2026 09:17 AM

जून 1984 में समय की सरकार द्वारा श्री हरिमंदिर साहिब और श्री अकाल तख्त साहिब पर किए गए हमले में अपने प्राण न्यौछावर करने वाले तथा मारे गए अन्य निर्दोष सिख पुरुषों और महिलाओं की याद में शिरोमणि कमेटी द्वारा वार्षिक शहीदी समागम करवाया गया।
अमृतसर (सर्बजीत): जून 1984 में समय की सरकार द्वारा श्री हरिमंदिर साहिब और श्री अकाल तख्त साहिब पर किए गए हमले में अपने प्राण न्यौछावर करने वाले तथा मारे गए अन्य निर्दोष सिख पुरुषों और महिलाओं की याद में शिरोमणि कमेटी द्वारा वार्षिक शहीदी समागम करवाया गया। समारोह में श्री हरिमंदिर साहिब के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी अमरजीत सिंह, शिरोमणि कमेटी के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी, तख्त श्री केसगढ़ साहिब के जत्थेदार एवं श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज, तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी टेक सिंह, बुड्ढा दल के प्रमुख बाबा बलबीर सिंह 96वें करोड़ी, मिसल शहीदां तरनादल के प्रमुख बाबा निहाल सिंह हरियां वेलां, दल बाबा बिधी चंद संप्रदाय के प्रमुख बाबा अवतार सिंह सुरसिंह, पूर्व जत्थेदार जसबीर सिंह खालसा सहित अनेक पंथक हस्तियों ने भाग लिया।
इस अवसर पर श्री अखंड पाठ साहिब के भोग के उपरांत हजूरी रागी जत्थे ने गुरबाणी कीर्तन किया तथा भाई प्रेम सिंह ने अरदास की। संगत को पावन हुकमनामा सिंह साहिब ज्ञानी अमरजीत सिंह ने सुनाया। समारोह में पहुंचे विभिन्न गर्म ख्याली संगठनों के नेताओं और कार्यकर्त्ताओं ने खालिस्तान के समर्थन में नारे लगाए वहीं दूसरी तरफ घल्लूघारे को लेकर अमृतसर में बंद का व्यापक असर दिखा। इस दौरान व्यापारिक प्रतिष्ठानों के साथ-साथ अन्य प्रतिष्ठान भी बंद रहे।
श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कहा कि जब समय की भारतीय हकूमत ने श्री हरिमंदिर साहिब और श्री अकाल तख्त साहिब पर सेना, टैंकों और तोपों से हमला किया तो इस घल्लूघारे के दौरान बड़ी संख्या में संगत, महिलाओं और बच्चों ने भी शहीदी प्राप्त की। जत्थेदार गड़गज्ज ने कहा कि सरकारों को हमेशा याद रखना चाहिए कि सिख इस देश में बराबरी के भागीदार हैं, दूसरे दर्जे के शहरी नहीं। उन्होंने कहा कि सिखों के प्रति अपनाई जा रही दोहरी नीतियां देशहित में नहीं हैं।
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