Edited By Niyati Bhandari,Updated: 26 Jan, 2026 03:09 PM

Sahastrabahu Arjuna Aur Ravan Yudh Ki Pauranik Katha: हिंदू शास्त्रों और पुराणों में रावण को त्रिलोक विजेता, महापराक्रमी और महान शिव भक्त बताया गया है। ब्रह्मा और भगवान शिव से प्राप्त वरदानों के कारण रावण अपराजेय माना जाता था। देवता तक उससे भयभीत...
Sahastrabahu Arjuna Aur Ravan Yudh Ki Pauranik Katha: हिंदू शास्त्रों और पुराणों में रावण को त्रिलोक विजेता, महापराक्रमी और महान शिव भक्त बताया गया है। ब्रह्मा और भगवान शिव से प्राप्त वरदानों के कारण रावण अपराजेय माना जाता था। देवता तक उससे भयभीत रहते थे। सामान्यतः रावण की पराजय की कथा में बालि और भगवान राम का ही नाम लिया जाता है, लेकिन त्रेता युग में एक ऐसे प्रतापी राजा हुए, जिन्होंने न केवल रावण को हराया, बल्कि उसे छह महीने तक बंदी बनाकर रखा। यह राजा थे कार्तवीर्य सहस्त्रबाहु अर्जुन।

कार्तवीर्य सहस्त्रबाहु अर्जुन कौन थे?
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, कार्तवीर्य अर्जुन हैहय वंश के महान सम्राट थे। उनका जन्म महाराज कार्तवीर्य और माता पद्मिनी के गर्भ से हुआ था। उन्हें सहस्त्रबाहु इसलिए कहा जाता है क्योंकि उन्हें भगवान दत्तात्रेय से एक हजार भुजाओं का वरदान प्राप्त था। शास्त्रों में सहस्त्रबाहु अर्जुन को भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र का अंशावतार भी माना गया है।
उनकी राजधानी थी माहिष्मती नगरी (वर्तमान मध्य प्रदेश का महेश्वर), जो नर्मदा नदी के तट पर स्थित थी। वे अत्यंत न्यायप्रिय, पराक्रमी और धर्मपालक राजा थे।

रावण का अहंकार और सहस्त्रबाहु से टकराव
जब लंकापति रावण ने सहस्त्रबाहु अर्जुन की अपार शक्ति और यश के बारे में सुना, तो उसका अहंकार जाग उठा। स्वयं को सर्वश्रेष्ठ योद्धा मानने वाला रावण उन्हें पराजित करने के उद्देश्य से माहिष्मती पहुंचा। नर्मदा तट पर उसने भगवान शिव को प्रसन्न करने हेतु कठोर तपस्या आरंभ कर दी।
इसी समय सहस्त्रबाहु अर्जुन अपनी रानियों के साथ नर्मदा नदी में जलक्रीड़ा करने पहुंचे। अपनी हजार भुजाओं से उन्होंने खेल-खेल में नर्मदा के प्रवाह को रोक दिया। नदी का जल चारों ओर फैल गया और रावण की तपस्या भंग हो गई।

सहस्त्रबाहु अर्जुन और रावण का भयंकर युद्ध
तपस्या भंग होने पर रावण क्रोध से भर उठा और सहस्त्रबाहु अर्जुन को युद्ध के लिए ललकारा। दोनों के बीच भयंकर संग्राम हुआ।
शास्त्रों के अनुसार, सहस्त्रबाहु अर्जुन ने अपनी अद्भुत शक्ति से रावण की सारी मायावी शक्तियों को निष्फल कर दिया और रावण को परास्त कर बंदी बना लिया।
यह वही रावण था जिसने देवताओं को पराजित किया था, लेकिन सहस्त्रबाहु अर्जुन के सामने वह विवश हो गया।
छह महीने तक रावण का कारावास
सहस्त्रबाहु अर्जुन ने रावण को माहिष्मती नगरी में छह महीने तक कारागार में बंदी बनाकर रखा। अंततः रावण के दादा महर्षि पुलस्त्य ने सहस्त्रबाहु अर्जुन से विनम्र प्रार्थना की, तब जाकर रावण को मुक्त किया गया।
इस घटना के बाद रावण का अहंकार कुछ समय के लिए शांत हो गया।
कथा का संदेश
यह पौराणिक कथा हमें सिखाती है कि अहंकार चाहे कितना ही बड़ा क्यों न हो, धर्म और संयम के सामने टिक नहीं सकता। शक्ति से अधिक महत्वपूर्ण है उसका सही उपयोग। सहस्त्रबाहु अर्जुन जैसे धर्मनिष्ठ राजा इतिहास और पुराणों में अमर हैं।
