Edited By Manisha,Updated: 20 Aug, 2026 02:59 PM

यूनिसेफ इंडिया के राष्ट्रीय एम्बेसडर आयुष्मान खुराना ने महाराष्ट्र के जालना में सीजनल माइग्रेशन से प्रभावित बच्चों से मुलाकात की और सुरक्षित बचपन, शिक्षा व बाल संरक्षण पर जोर दिया।
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। यूनिसेफ इंडिया के राष्ट्रीय एम्बेसडर आयुष्मान खुराना ने महाराष्ट्र के जालना का दौरा किया, जहां उन्होंने सीजनल माइग्रेशन से प्रभावित बच्चों, किशोरियों, परिवारों और समुदाय के सदस्यों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने परिवार और समुदाय आधारित देखभाल की अहमियत को समझा और बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य और मानसिक कल्याण से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की।
बच्चों के अधिकारों और सुरक्षित बचपन पर क्या बोले आयुष्मान?
आयुष्मान ने कहा, “किसी भी बच्चे को अपनी परिस्थितियों के कारण अपना बचपन नहीं खोना चाहिए।” उन्होंने बताया कि जालना में उन्होंने देखा कि समुदाय किस तरह मिलकर प्रवास से प्रभावित बच्चों को परिवार, देखभाल और सहयोग से जोड़े रखने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किनशिप केयर सिर्फ बच्चों को सुरक्षित घर देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके रिश्तों को बनाए रखने, आत्मविश्वास बढ़ाने और बेहतर भविष्य की उम्मीद देने में भी मदद करता है।
शिक्षा के जरिए बदल सकती है बच्चों की जिंदगी
दौरे के दौरान आयुष्मान ने बालमित्रों और युवा कम्युनिटी लीडर्स से भी मुलाकात की। उन्होंने 18 वर्षीय शिल्पा का उदाहरण देते हुए बताया कि वह पहले अपने परिवार के साथ सीजनल माइग्रेशन करती थीं, लेकिन अब स्कूल पूरा करने के बाद वोकेशनल कोर्स में दाखिला ले चुकी हैं। आयुष्मान ने कहा कि जब बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षित माहौल मिलता है, तो लड़कियां अपने सपनों को पूरा कर सकती हैं और माइग्रेशन के पीढ़ीगत चक्र को तोड़ सकती हैं।
यूनिसेफ के साथ मिलकर मजबूत हो रहा बाल संरक्षण
जालना में यूनिसेफ, महाराष्ट्र सरकार, जिला प्रशासन और एनजीओ साझेदारों के सहयोग से किनशिप और कम्युनिटी केयर कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य बच्चों को स्कूल से जोड़े रखना और उन्हें स्वास्थ्य, पोषण व मनोसामाजिक सहयोग जैसी सेवाओं तक पहुंच दिलाना है। आयुष्मान ने कहा कि “हर बच्चे का अधिकार है कि वह सुरक्षित, प्यार भरे और पोषण देने वाले पारिवारिक वातावरण में बड़ा हो।” यूनिसेफ के मुताबिक, 2024-25 में 5,800 से अधिक बच्चे किनशिप केयर में बने रहे, जबकि उनके माता-पिता सीजनल काम के लिए प्रवास कर गए थे।