Edited By Prachi Sharma,Updated: 09 Sep, 2026 07:01 PM

Sandeepa Virk : सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और एक्ट्रेस संदीपा विर्क ने अपनी जिंदगी के सबसे मुश्किल समय को याद करते हुए जेल में बिताए दिनों का दर्द बयां किया। मनी लॉन्ड्रिंग केस के सिलसिले में वह करीब साढ़े चार महीने तिहाड़ जेल में रही थीं। उस दौर को याद...
Sandeepa Virk : सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और एक्ट्रेस संदीपा विर्क ने अपनी जिंदगी के सबसे मुश्किल समय को याद करते हुए जेल में बिताए दिनों का दर्द बयां किया। मनी लॉन्ड्रिंग केस के सिलसिले में वह करीब साढ़े चार महीने तिहाड़ जेल में रही थीं। उस दौर को याद करते ही आज भी वह भावुक हो जाती हैं और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़ते हैं। संदीपा ने जेल की जिंदगी को अपनी जिंदगी का सबसे भयावह अनुभव बताया।

कैदियों के उतरवाते थे कपड़े
एक पॉडकास्ट के दौरान एक्ट्रेस ने बताया कि तिहाड़ जेल में व्यक्ति के आत्मसम्मान को बुरी तरह से हिला दिया जाता है। वहां कैदियों की मानसिक व शारीरिक स्थिति पर सवाल उठाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि चेकिंग के नाम पर व्यक्ति के साथ बहुत बुरा सुलूक किया जाता था। कड़ाके की ठंड में कैदियों के कपड़े उतरवाकर जांच की जाती है और प्राइवेट पार्ट्स पर टोर्च जलाकर तलाशी ली जाती है, जो बेहद शर्मनाक और अमानवीय है।
संदीपा ने इस चेकिंग प्रक्रिया की मंशा पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि जब सुरक्षा जांच इतनी सख्त और निजता को तार-तार करने वाली होती है, तब भी जेल के भीतर मोबाइल फोन और नशीले पदार्थ कैसे पहुंच जाते हैं। इसका मलतब तो ये है यदि आपके पास पैसा है तो आप कुछ भी कर सकते हैं।

मुंह और बाल खुलवाते हैं
यह टॉर्चर यहां खत्म नहीं होता, इसके बाद अलग-अलग औरतें चेकिंग करने आती हैं। दिन में कितनी बार कपडे उतरवाए जाते थे। मुझे इतनी बार कपड़े उतरवाना सही नहीं लगा। इसके बाद कैदियों के बाल और मुंह तक खुलवाए जाते थे। कम से कम दिन में 3 बार आपको पूरी तरह से न्यूड किया जाता है। कुछ लोग तो ऐसी बातें करते थे उस समय कि मेरा खून उबलने लगता था। लड़की ही तो देख रही है। क्या हो गया कपड़े उतर गए तो ? ऐसी सोच पर मुझे बहुत गुस्सा आता था।
खाना और टॉयलेट बहुत गंदे थे
संदीपा ने बताया कि वहां का खाना और बाथरूम हद से ज्यादा गंदा था। पहले ही दिन उन्हें 25-26 अन्य कैदियों के साथ रख दिया गया, जिससे असहजता के कारण वह पहली रात सो भी नहीं पाईं। उन्होंने बताया कि अपने गुस्से पर नियंत्रण न रख पाने की वजह से जेल में उनकी अन्य लोगों से हाथापाई भी हो जाती थी। वहां दी जाने वाली प्रताड़ना इतनी भयानक थी कि मानसिक रूप से टूटकर उनके मन में आत्महत्या तक का विचार आने लगा था।
