Edited By Tanuja,Updated: 09 Sep, 2026 06:31 PM

पाकिस्तान ने अफगान छात्रों के मेडिकल और डेंटल पाठ्यक्रमों में नए दाखिले पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। पहले से पढ़ रहे अफगान छात्रों को भी लौटने को कहा गया है। KEMU में 22 छात्र प्रभावित हुए हैं। हालांकि वैध पासपोर्ट और वीजा वाले छात्र नियमों के...
Islamabad: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के संबंधों में बढ़ते तनाव के बीच इस्लामाबाद ने देशभर के चिकित्सा संस्थानों को अफगान विद्यार्थियों को निकालने और दाखिला न देने का आदेश दिया है। सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। इस फैसले से पाकिस्तान में स्नातक स्तर के चिकित्सा और दंत चिकित्सा पाठ्यक्रमों की पढ़ाई कर रहे सैकड़ों अफगान छात्र प्रभावित हो सकते हैं। इनमें कुछ ऐसे छात्र भी हैं, जो जल्द ही अपनी पढ़ाई पूरी करने वाले हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तान चिकित्सा एवं दंत चिकित्सा परिषद ने चिकित्सा और दंत चिकित्सा संस्थानों को जारी निर्देश में मौजूदा शैक्षणिक सत्र के दौरान अफगान विद्यार्थियों को दाखिला देने पर रोक लगा दी है।
उन्होंने कहा कि चिकित्सा और दंत चिकित्सा पाठ्यक्रमों में पहले से दाखिला ले चुके अफगान छात्रों को भी अफगानिस्तान लौटने का निर्देश दिया गया है। अधिकारी ने कहा कि यह फैसला पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बिगड़ते संबंधों को देखते हुए लिया गया है और यह केवल अफगान नागरिकों पर लागू होगा। अन्य देशों के छात्रों पर इसका असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, विदेश कार्यालय ने संकेत दिया कि वैध यात्रा और निवास संबंधी दस्तावेज रखने वाले अफगान छात्र मौजूदा नियमों के तहत अपने वीजा की अवधि बढ़ाने के लिए आवेदन करना जारी रख सकते हैं। विदेश कार्यालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान ने 'डॉन' अखबार से कहा कि पाकिस्तान की 'अवैध विदेशी नागरिक स्वदेश वापसी योजना' कहती है कि वैध पासपोर्ट और वीजा के बिना किसी विदेशी नागरिक का देश में रहना गैरकानूनी है और ऐसे लोगों को निर्वासित किया जा सकता है।
उन्होंने कहा, "हालांकि, पाकिस्तानी अधिकारी हमारी मौजूदा नीति, नियमों और विनियमों के अनुसार अफगान छात्रों के वीजा की अवधि बढ़ाने के आवेदनों पर नियमानुसार कार्रवाई जारी रखे हुए हैं।" लाहौर स्थित किंग एडवर्ड चिकित्सा विश्वविद्यालय (केईएमयू) इस आदेश को लागू करने वाला पहला सार्वजनिक क्षेत्र का संस्थान है। विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, "केईएमयू में इस समय 22 अफगान छात्र पढ़ रहे हैं और उन्हें आवश्यक कानूनी तथा प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी करने के लिए 24 घंटे का समय दिया गया है।" यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब इस्लामाबाद और काबुल के बीच संबंध तनावपूर्ण हैं। पाकिस्तान का आरोप है कि प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) अफगानिस्तान की जमीन से गतिविधियां संचालित कर रहा है। तालिबान प्रशासन ने इस आरोप से इनकार किया है।