Edited By Reetu sharma,Updated: 17 Feb, 2026 03:02 PM

भू-राजनीतिक तनाव और संस्थाओं पर घटते भरोसे के बीच निखिल कामथ ने इतिहासकार और लेखक युवाल नोआ हरारी के साथ मौजूदा वैश्विक हालात पर बातचीत की।
नई दिल्ली। भू-राजनीतिक तनाव और संस्थाओं पर घटते भरोसे के बीच निखिल कामथ ने इतिहासकार और लेखक युवाल नोआ हरारी के साथ मौजूदा वैश्विक हालात पर बातचीत की। यह चर्चा दावोस में आयोजित World Economic Forum के दौरान रिकॉर्ड की गई।
भरोसे के बिना नहीं टिकती सभ्यता
हरारी ने कहा कि मानव समाज की असली ताकत बड़े पैमाने पर सहयोग है, और यह सहयोग संस्थाओं में भरोसे पर टिका होता है। बैंकिंग सिस्टम, कानून, राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समझौते तभी काम करते हैं जब लोग उन्हें मान्यता देते हैं। जैसे ही यह विश्वास कमजोर होता है, अस्थिरता बढ़ने लगती है।
संस्थाओं से हटकर व्यक्तियों पर केंद्रित राजनीति
बातचीत में बताया गया कि आज राजनीति तेजी से संस्थाओं से हटकर नेताओं पर केंद्रित होती जा रही है। हरारी ने चेतावनी दी कि लोकतंत्र सिर्फ चुनाव से नहीं चलता, बल्कि निष्पक्ष प्रक्रियाओं, साझा तथ्यों और निरंतरता से चलता है। जब यह ढांचा कमजोर पड़ता है, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था खतरे में आ जाती है।
आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस से बदलती सत्ता की संरचना
AI को लेकर चिंता यह नहीं है कि वह सिर्फ नौकरियां छीनेगी, बल्कि यह भी कि वह जानकारी, राय और फैसलों को प्रभावित करेगी। जब मशीनें कंटेंट और कहानियां बनाने लगेंगी, तब समाज के लिए सच और भ्रम में फर्क करना और मुश्किल होगा।
बाजार और भू-राजनीति दोनों भरोसे पर टिके
निखिल कामथ ने कहा कि जैसे वित्तीय बाजार भरोसे से चलते हैं, वैसे ही अंतरराष्ट्रीय संबंध भी विश्वास की नींव पर टिके होते हैं। अगर भरोसा टूटता है, तो आर्थिक और राजनीतिक दोनों प्रणालियां अस्थिर हो जाती हैं।
वैश्विक भविष्य को लेकर गंभीर चेतावनी
यह पूरी बातचीत People by WTF में दिखाई गई, जो संस्थाओं के कमजोर होने, लोकतंत्र के दबाव में आने और तकनीक से बदलती दुनिया की बड़ी तस्वीर सामने रखती है। संदेश साफ है दुनिया आज भरोसे के सबसे बड़े संकट से गुजर रही है।