Edited By Tanuja,Updated: 17 Feb, 2026 11:21 AM

जेफ्री एप्सटीन की मौत को लेकर नए फॉरेंसिक दावे, कथित नकली शव, कैमरों की संदिग्ध खराबी और कोडेड ईमेल्स सामने आए हैं। एक फॉरेंसिक विश्लेषक और एक पीड़िता के इंटरव्यू ने जांच एजेंसियों की भूमिका और आधिकारिक निष्कर्षों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
International Desk: अमेरिकी फाइनेंसर और दोषी यौन अपराधी Jeffrey Epstein की मौत को लेकर विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। हाल ही में सामने आए नए दस्तावेज़ों, वीडियो फुटेज और अंतर्राष्ट्रीय विश्लेषक और पत्रकार Mario Nawfal द्वारा लिए जा रहे इंटरव्यूज़ में हुए खुलासों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या एप्सटीन की मौत से जुड़ी आधिकारिक कहानी पूरी तरह सही है। हालांकि, ये सभी दावे और आरोप अभी सार्वजनिक बहस और जांच के दायरे में हैं, न कि किसी अदालत द्वारा स्थापित तथ्य।
फॉरेंसिक विश्लेषक के चौंकाने वाले दावे
एक इंटरव्यू में फॉरेंसिक विश्लेषक डॉ. गैरीसन ने दावा किया कि अस्पताल से बाहर ले जाए गए जिस शव की तस्वीरें मीडिया में आई थीं, उसके कान और नाक एप्सटीन से मेल नहीं खाते। उन्होंने यह भी कहा कि हालिया फाइलों में FBI ने स्वीकार किया है कि प्रेस को “गुमराह” करने के लिए एक डिकॉय (नकली) शव इस्तेमाल किया गया। डॉ. गैरीसन के अनुसार, एप्सटीन की ऑटोप्सी रिपोर्ट में कई अहम विवरण गायब हैं। रिपोर्ट में उन्हें “सामान्य खतना किया हुआ पुरुष” बताया गया, जबकि पीड़िताओं ने उनके शरीर को अलग और विकृत बताया था। एक और बड़ा सवाल यह है कि एप्सटीन की मौत की घोषणा से जुड़ी एफबीआई प्रेस रिलीज़ कथित तौर पर मौत से एक दिन पहले की तारीख की बताई जा रही है।

कैमरे बंद थे या जानबूझकर बंद किए गए?
इंटरव्यू में यह भी दावा किया गया कि जिस जेल में एप्सटीन बंद थे, वहां के कैमरे उसी समय काम करना बंद कर गए जब वे वापस लाए गए, और उनकी मौत के अगले दिन फिर से ठीक हो गए। डॉ. गैरीसन का कहना है कि उन्होंने ऐसे फुटेज भी खोजे हैं, जिनके बारे में Department of Justice ने पहले दावा किया था कि वे रिकॉर्ड ही नहीं हो रहे थे।

कोडेड ईमेल्स और ‘पिज़्ज़ा भाषा’
नवीनतम फाइलों में ऐसे ईमेल्स का जिक्र है जिनमें “पिज़्ज़ा”, “चीज़”, “बीफ जर्की”, “श्रिम्प” और “व्हाइट शार्क” जैसे शब्द अजीब संदर्भों में इस्तेमाल हुए हैं। फॉरेंसिक विश्लेषक का दावा है कि ये शब्द कथित तौर पर नाबालिग लड़कियों के लिए कोड थे। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अब तक नहीं हुई है।

पीड़िता ने तोड़ी चुप्पी
एक अन्य इंटरव्यू में एप्सटीन की कथित पीड़िता जूलियट ब्रायंट ने आरोप लगाया कि 2002 से 2004 के बीच एप्सटीन के प्रभाव में रहते हुए उन्हें डराया-धमकाया गया। उन्होंने दावा किया कि एप्सटीन खुद को खुफिया एजेंसियों से जुड़ा बताता था और पूरी तरह बेखौफ था। जूलियट ने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि उनके साथ बिना सहमति के मेडिकल प्रक्रियाएं की गईं।
ब्लैकमेल और प्रभावशाली नेटवर्क
डॉ. गैरीसन के अनुसार, एप्सटीन के पास कई प्रभावशाली लोगों के “बैकअप” थे, जिनका इस्तेमाल ब्लैकमेल के लिए किया जा सकता था। मशहूर फिल्ममेकर Woody Allen के कथन का भी जिक्र हुआ, जिसमें उन्होंने एप्सटीन को “काउंट ड्रैकुला की तरह लोगों को इकट्ठा करने वाला” बताया था। इन सभी इंटरव्यूज़ और फाइलों ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि एप्सटीन की मौत के मामले में अभी भी कई सवाल अनुत्तरित हैं। हर नई जानकारी सच्चाई साफ करने के बजाय और संदेह पैदा कर रही है। हालांकि, जांच एजेंसियों की ओर से इन दावों पर कोई नया आधिकारिक निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है।