Edited By Niyati Bhandari,Updated: 17 Feb, 2026 07:34 AM

Surya Grahan 2026: 17 फरवरी 2026 को साल का पहला सूर्य ग्रहण लगेगा। जानें समय, सूतक काल, किन देशों में दिखेगा और भारत पर क्या होगा प्रभाव
Surya Grahan 2026: इस वर्ष का पहला सूर्य ग्रहण मंगलवार, 17 फरवरी 2026 को लगने जा रहा है। भारतीय समयानुसार यह ग्रहण दोपहर 3 बजकर 26 मिनट पर आरंभ होगा और सायं 7 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। यह खगोलीय घटना ज्योतिष और धर्म दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, हालांकि भारत में इसका कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं माना जाएगा।

किन देशों में दिखाई देगा सूर्य ग्रहण?
यह सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से अंटार्कटिका, दक्षिण अफ्रीका तथा दक्षिण अमेरिका के कई हिस्सों में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। इन क्षेत्रों में रहने वाले लोग इस अद्भुत खगोलीय घटना का प्रत्यक्ष दर्शन कर सकेंगे। कुछ स्थानों पर यह आंशिक तो कुछ जगहों पर वलयाकार रूप में भी दिखाई दे सकता है।
भारत में नहीं दिखेगा ग्रहण
यह सूर्य ग्रहण भारत के किसी भी भाग में दृश्य नहीं होगा। शास्त्रों के अनुसार जिस देश में ग्रहण दिखाई नहीं देता, वहां उसका धार्मिक या ज्योतिषीय प्रभाव मान्य नहीं होता। इसी कारण भारत में इस ग्रहण का सूतक काल लागू नहीं होगा।

सूतक काल क्या होता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य ग्रहण से लगभग 12 घंटे पूर्व सूतक काल आरंभ हो जाता है। इस दौरान पूजा-पाठ, शुभ कार्य, मंदिर प्रवेश और भोजन पकाने जैसे कार्यों से परहेज किया जाता है। लेकिन चूंकि यह ग्रहण भारत में दृष्टिगोचर नहीं होगा, इसलिए यहां सूतक काल मान्य नहीं रहेगा। लोग अपने दैनिक कार्य सामान्य रूप से कर सकते हैं।
राशियों और राजनीति पर प्रभाव
पंडित शिव कुमार शर्मा ने बताया कि शास्त्रों में स्पष्ट उल्लेख है कि जिस देश में ग्रहण दिखाई नहीं देता, वहां उसकी किसी भी राशि, राजनीतिक स्थिति, आर्थिक गतिविधियों या कारोबार पर शुभ-अशुभ प्रभाव नहीं पड़ता। इसलिए भारत में न तो बाजार पर कोई विशेष तेजी-मंदी का असर पड़ेगा और न ही राजनीतिक परिस्थितियों में कोई ज्योतिषीय बदलाव माना जाएगा।

वैज्ञानिक और ज्योतिषीय महत्व
सूर्य ग्रहण तब लगता है जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी एक सीध में आ जाते हैं और चंद्रमा सूर्य के प्रकाश को आंशिक या पूर्ण रूप से ढक लेता है। वैज्ञानिक दृष्टि से यह एक सामान्य खगोलीय घटना है, लेकिन ज्योतिष शास्त्र में इसे विशेष ऊर्जा परिवर्तन का संकेत माना जाता है। हालांकि प्रभाव केवल उन्हीं क्षेत्रों में प्रमुख माना जाता है जहां ग्रहण दिखाई देता है।
17 फरवरी 2026 का सूर्य ग्रहण खगोलीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है, लेकिन भारत में इसके न दिखाई देने के कारण इसका कोई धार्मिक या ज्योतिषीय प्रभाव मान्य नहीं होगा। सूतक काल भी लागू नहीं होगा और आम जनजीवन सामान्य रहेगा।
