Edited By Tanuja,Updated: 21 Sep, 2026 02:08 PM

पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के कुनार और पक्तिका क्षेत्रों में हवाई हमले किए जाने की खबर है। नर्गल जिले में एक मकान समेत कई इमारतों को नुकसान पहुंचा और कई लोगों के घायल होने की जानकारी है। दोनों देशों के बीच डुरंड रेखा और टीटीपी को लेकर लंबे समय से तनाव...
Kabul: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, सोमवार तड़के करीब साढ़े तीन बजे पाकिस्तानी लड़ाकू विमान कुनार और आसपास के इलाकों में उड़ते दिखाई दिए। इसके बाद कई स्थानों पर ताबड़तोड़ बम गिराए गए। अचानक हुए हमलों में 3 लोगों की मौत हो गई । नर्गल जिले के पतंग इलाके में नूर मोहम्मद नाम के एक व्यक्ति के घर को भी निशाना बनाए जाने की खबर है। बमबारी के बाद यह घर पूरी तरह मलबे में बदल गया। आसपास के कुछ मकानों को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। हमले के बाद स्थानीय लोग क्षतिग्रस्त मकानों के मलबे में अपना सामान तलाशते दिखाई दिए। हालांकि, जिस मकान को निशाना बनाया गया उसमें हमले के समय कितने लोग मौजूद थे, इसकी स्पष्ट जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
बता दें कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से डुरंड रेखा और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी टीटीपी को लेकर विवाद चला आ रहा है। करीब 2,640 किलोमीटर लंबी डुरंड रेखा दोनों देशों के बीच सीमा का काम करती है। इसे 1893 में तत्कालीन ब्रिटिश भारत और अफगानिस्तान के बीच तय किया गया था। अफगानिस्तान लंबे समय से इस रेखा को स्थायी अंतरराष्ट्रीय सीमा के रूप में स्वीकार करने से इनकार करता रहा है। अफगान पक्ष का तर्क है कि इस सीमा ने पश्तून आबादी वाले क्षेत्रों को विभाजित कर दिया। पाकिस्तान का आरोप है कि टीटीपी के लड़ाके अफगानिस्तान में सुरक्षित ठिकाने हासिल कर पाकिस्तान में हमले करते हैं। पाकिस्तान अफगान तालिबान सरकार से इन ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग करता रहा है।
अफगानिस्तान इन आरोपों को खारिज करता है। उसका कहना है कि पाकिस्तान अपने भीतर की सुरक्षा समस्याओं के लिए अफगानिस्तान को जिम्मेदार ठहरा रहा है।इसी विवाद के कारण पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में टीटीपी से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाने की कार्रवाई की है। कुनार और पक्तिका जैसे सीमावर्ती इलाके इस तनाव में कई बार प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा अफगान शरणार्थियों को पाकिस्तान से वापस भेजने की कार्रवाई और सीमा बंद होने से दोनों देशों के संबंधों पर आर्थिक दबाव भी बढ़ा है। सीमा पर तनाव के कारण व्यापार और माल की आवाजाही प्रभावित होने से आम लोगों और कारोबारियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।