ICE की 'वर्स्ट ऑफ द वर्स्ट' लिस्ट में 89 भारतीय शामिल, ज्यादातर फाइनेंशियल फ्रॉड के दोषी, DHS का बड़ा दावा

Edited By Updated: 06 Feb, 2026 07:37 PM

89 indians are included in ice s  worst of the worst  list

अमेरिका में इमिग्रेशन कार्रवाई को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने ट्रंप प्रशासन के सख्त इमिग्रेशन अभियान के तहत ‘Arrested: Worst of the Worst’ नाम से एक सार्वजनिक ऑनलाइन डेटाबेस जारी किया है। इस...

नेशनल डेस्क : अमेरिका में इमिग्रेशन कार्रवाई को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने ट्रंप प्रशासन के सख्त इमिग्रेशन अभियान के तहत ‘Arrested: Worst of the Worst’ नाम से एक सार्वजनिक ऑनलाइन डेटाबेस जारी किया है। इस लिस्ट में साल 2025 से अब तक ICE द्वारा गिरफ्तार किए गए करीब 25 हजार अप्रवासियों का ब्योरा दिया गया है, जिसमें कम से कम 89 भारतीय नागरिकों के नाम भी शामिल हैं।

DHS की इस वेबसाइट पर हर व्यक्ति का नाम, फोटो (मगशॉट), गिरफ्तारी की जगह और उस पर लगे आरोप सार्वजनिक किए गए हैं। इन सभी को “वर्स्ट ऑफ द वर्स्ट” की श्रेणी में रखा गया है। अधिकारियों के मुताबिक, सूची में शामिल लोगों पर वित्तीय धोखाधड़ी, हिंसक अपराध, ड्रग तस्करी, यौन अपराध और अन्य गंभीर मामलों के आरोप या दोषसिद्धि दर्ज हैं।

89 भारतीयों पर किन अपराधों के आरोप

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन 89 भारतीय नागरिकों में से बड़ी संख्या पर गंभीर अपराधों के मामले दर्ज हैं।

  • 22 मामलों में चोरी, टैक्स फ्रॉड, वायर फ्रॉड जैसे वित्तीय अपराध शामिल हैं।
  • 21 लोगों को हमला, सेंधमारी जैसे हिंसक अपराधों में दोषी ठहराया गया है।
  • 17 मामलों में यौन अपराधों से जुड़ी सजा दर्ज है।

इसके अलावा ड्रग्स, घरेलू हिंसा, तस्करी और हत्या जैसे आरोप भी सूची में शामिल हैं। पूरी लिस्ट में हिट-एंड-रन के बाद हत्या के मामले में सिर्फ एक व्यक्ति को दोषी ठहराया गया है।
यूजर्स इस डेटाबेस में नाम, राष्ट्रीयता, अपराध और अमेरिकी राज्य के आधार पर सर्च कर सकते हैं।

DHS ने क्यों शुरू की यह वेबसाइट

DHS की पब्लिक अफेयर्स की सहायक सचिव ट्रिशिया मैकग्लॉघलिन ने कहा कि इस प्लेटफॉर्म का मकसद पारदर्शिता बढ़ाना है। उनके मुताबिक, इससे अमेरिकी जनता खुद देख सकती है कि किन “आपराधिक अवैध विदेशियों” को गिरफ्तार किया गया, उन्होंने क्या अपराध किए और किन समुदायों से उन्हें हटाया गया। DHS का दावा है कि इससे यह भरोसा मिलता है कि कार्रवाई गंभीर अपराधों में शामिल लोगों पर केंद्रित है।

आलोचकों ने उठाए सवाल

हालांकि, वेबसाइट लॉन्च होते ही इस पर तीखी आलोचना भी शुरू हो गई है। मानवाधिकार संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि बिना पूरे संदर्भ के मगशॉट और बड़े-बड़े आपराधिक लेबल प्रकाशित करना, इमिग्रेशन और अपराध को जोड़ने वाली रूढ़िवादी सोच को बढ़ावा दे सकता है।

मेन इमिग्रेंट्स राइट्स कोएलिशन के रूबेन टोरेस ने चेतावनी दी कि अगर लोग इस वेबसाइट पर सिर्फ रंग के लोगों की तस्वीरें देखते हैं, तो वे अप्रवासियों को “सबसे बुरे अपराधियों” के तौर पर देखने लगेंगे। वहीं, यूनिवर्सिटी ऑफ मेन स्कूल ऑफ लॉ की अन्ना वेल्च ने इसे एक “कम्युनिकेशन स्ट्रैटेजी” बताया, जिसका मकसद बड़े पैमाने पर इमिग्रेशन कार्रवाई और उस पर होने वाले अरबों डॉलर के खर्च को सही ठहराना है।

DHS का जवाब

आलोचनाओं के बावजूद DHS अपने फैसले पर कायम है। विभाग का कहना है कि इस डेटाबेस का उद्देश्य केवल यह दिखाना है कि इमिग्रेशन एजेंसियां किन प्राथमिकताओं पर काम कर रही हैं और जनता को यह भरोसा दिलाना है कि कार्रवाई गंभीर अपराधों में शामिल लोगों पर ही की जा रही है।

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