अडानी समन मामले में भारतीय सरकार को बायपास करना चाहता है अमेरिकी नियामक SEC

Edited By Updated: 24 Jan, 2026 12:55 PM

the us regulator wants to bypass the indian government in the adani summon case

अमेरिकी बाजार नियामक SEC ने गौतम अडानी और सागर अडानी को कथित धोखाधड़ी और 265 मिलियन डॉलर रिश्वत मामले में समन भेजने के लिए अमेरिकी अदालत से ई-मेल के जरिए नोटिस भेजने की अनुमति मांगी है। भारत सरकार द्वारा दो बार अनुरोध ठुकराए जाने के बाद यह कदम उठाया...

नेशनल डेस्क : अमेरिका की बाजार नियामक संस्था सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) ने भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी और अडानी समूह के वरिष्ठ अधिकारी सागर अडानी को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। SEC ने अमेरिका की एक अदालत से अनुमति मांगी है कि वह दोनों को समन (समन नोटिस) सीधे ई-मेल के जरिए भेज सके। यह मामला कथित धोखाधड़ी और करीब 265 मिलियन डॉलर की रिश्वत योजना से जुड़ा हुआ है।

SEC ने अदालत को बताया कि भारत सरकार अब तक दो बार समन भेजने के उसके अनुरोध को खारिज कर चुकी है। इसी वजह से नियामक संस्था को सामान्य कानूनी प्रक्रिया के जरिए समन पहुंचने की उम्मीद नहीं है। यह अमेरिका में किसी भारतीय कारोबारी समूह से जुड़ा अब तक का सबसे चर्चित कानूनी मामला माना जा रहा है। SEC पिछले साल से ही अडानी समूह के संस्थापक गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी को समन भेजने की कोशिश कर रही है।

अडानी समूह ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। समूह का कहना है कि ये आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं और वह अपने बचाव के लिए सभी कानूनी विकल्प अपनाएगा। हालांकि, SEC की ताजा अदालत में दाखिल याचिका पर अडानी समूह की ओर से फिलहाल कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

SEC ने न्यूयॉर्क की अदालत में दाखिल अपने जवाब में कहा है कि मौजूदा रास्ते से समन की तामील संभव नहीं दिख रही है, इसलिए उसे सीधे ई-मेल के जरिए समन भेजने की अनुमति दी जानी चाहिए। वहीं, भारत के कानून मंत्रालय ने भी इस नई याचिका पर अभी कोई टिप्पणी नहीं की है। इससे पहले मंत्रालय ने इस पूरे मामले को निजी कंपनियों और अमेरिका के बीच का कानूनी विवाद बताया था।

SEC के अनुसार, भारत की ओर से समन तामील के अनुरोध को खारिज करने के पीछे कुछ प्रक्रियात्मक कारण बताए गए थे, जैसे दस्तखत और सरकारी मुहर से जुड़े नियम। हालांकि, SEC का कहना है कि हेग कन्वेंशन जैसे अंतरराष्ट्रीय समझौतों के तहत विदेश में व्यक्तियों को भेजे जाने वाले समन में ऐसी औपचारिकताओं की जरूरत नहीं होती। दिसंबर में दूसरी बार समन लौटाए जाने के दौरान भारत के कानून मंत्रालय ने SEC के अधिकारों पर भी सवाल उठाए थे।

अब इस मामले में अमेरिकी अदालत का फैसला अहम माना जा रहा है, क्योंकि उसी के आधार पर यह तय होगा कि SEC अडानी समूह के शीर्ष अधिकारियों को सीधे ई-मेल के जरिए समन भेज पाएगी या नहीं।

 

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