Edited By Tanuja,Updated: 24 Jan, 2026 01:43 PM

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के कड़े बयानों से नाराज होकर उन्हें ‘शांति बोर्ड’ में शामिल होने का निमंत्रण वापस ले लिया। इस कदम से पश्चिमी सहयोगियों में अमेरिका की नई वैश्विक नीति को लेकर असहजता बढ़ गई है।
Washington: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को ‘शांति बोर्ड’ में शामिल होने के लिए दिया गया निमंत्रण वापस ले लिया है। यह फैसला ट्रंप ने कार्नी के उस “आक्रामक” रुख के बाद लिया, जिसमें उन्होंने मध्यम शक्ति वाले देशों से अमेरिका जैसी महाशक्तियों के सामने एकजुट होने की अपील की थी। यह शांति बोर्ड शुरुआत में गाजा में इजराइल–हमास युद्ध को रोकने के उद्देश्य से बनाया गया था, लेकिन कई पश्चिमी देशों को आशंका है कि यह संयुक्त राष्ट्र जैसी वैश्विक संस्थाओं के विकल्प के रूप में उभर सकता है। इसी कारण ट्रंप की इस पहल को सहयोगी देश संदेह की नजर से देख रहे हैं।
दावोस में विश्व आर्थिक मंच के दौरान कार्नी ने कहा था कि अगर देश बातचीत की मेज पर नहीं हैं, तो वे दांव पर लग जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मध्यम शक्ति वाले देशों को मिलकर एक “तीसरा रास्ता” बनाना चाहिए, ताकि वे महाशक्तियों की कृपा पर निर्भर न रहें। कार्नी के इन बयानों पर ट्रंप ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और कहा कि “कनाडा का अस्तित्व अमेरिका की वजह से है।” इसके साथ ही उन्होंने कनाडा को दिया गया शांति बोर्ड का निमंत्रण रद्द कर दिया।
हालांकि, कार्नी ने अपने रुख से पीछे हटने से इनकार किया और कहा कि कनाडा उथल-पुथल से भरी दुनिया में एक वैकल्पिक और लोकतांत्रिक रास्ता दिखा सकता है। इस बीच, ट्रंप के बयानों को लेकर ब्रिटेन समेत कई देशों में नाराजगी देखी गई, जिससे अमेरिका और उसके पारंपरिक सहयोगियों के रिश्तों में बढ़ते तनाव के संकेत मिल रहे हैं।