Edited By Tanuja,Updated: 12 Apr, 2026 12:33 PM

इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान वार्ता गतिरोध में खत्म हुई। ईरान ने अमेरिकी मांगों को “BIG NO” कहकर खारिज कर दिया। 21 घंटे की बातचीत के बाद भी कोई समझौता नहीं हुआ। होर्मुज जलडमरूमध्य बंद ही रहा, जिससे वैश्विक तनाव और ऊर्जा संकट की चिंता बढ़ गई।
International Desk: इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई हाई-स्टेक शांति वार्ता आखिरकार गतिरोध में खत्म हो गई। करीब 21 घंटे तक चली इस मैराथन बातचीत के बावजूद कोई ठोस समझौता नहीं हो सका। ईरान ने साफ शब्दों में अमेरिकी मांगों को खारिज करते हुए “BIG NO” कहा। ईरान के अधिकारियों का दावा है कि अमेरिका दबाव बनाकर वह हासिल करना चाहता था, जो वह युद्ध के जरिए नहीं कर पाया।
ईरान के मुताबिक, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल, जिसका नेतृत्व जे डी वेंस कर रहे थे, बिना किसी ठोस परिणाम के वापस लौट रहा है। ईरान ने कहा कि वह अपने रणनीतिक हितों पर कोई समझौता नहीं करेगा। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि कुछ मुद्दों पर सहमति बनी, लेकिन 2-3 बड़े मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यह वार्ता अविश्वास के माहौल में हुई।
इस बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी तनाव बना हुआ है। ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका “उचित समझौते” पर सहमत नहीं होता, तब तक इस अहम जलमार्ग की स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा। ईरान के सूत्रों का कहना है कि “गेंद अब अमेरिका के पाले में है” और तेहरान को किसी तरह की जल्दबाजी नहीं है। इस्लामाबाद वार्ता ने साफ कर दिया कि शांति की राह अभी लंबी और मुश्किल है। अब यह पूरी तरह अमेरिका के अगले कदम पर निर्भर करेगा कि बातचीत आगे बढ़ेगी या टकराव और गहराएगा।